कानपुर देहात। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अकबरपुर में शुक्रवार को मेडिकोलीगल कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें चिकित्सकों को कानूनी अधिकारों, दायित्वों और सुरक्षा प्रावधानों की जानकारी दी गई। अपर जिला जज रजत सिन्हा ने कहा चिकित्साकर्मियों के साथ हिंसा करने वालों पर लागू कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने मरीजों के परिजनों से हिंसा के बजाय वैधानिक विकल्प अपनाने की अपील की।
कार्यशाला का शुभारंभ अपर जिला जज रजत सिन्हा, वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार वाजपेयी, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह चौहान और प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने सरस्वती प्रतिमा के समक्ष ने दीप प्रज्वलित कर किया। पहले सत्र में वरिष्ठ बाल रोग एवं मेडिकोलीगल विशेषज्ञ डॉ. जेके गुप्ता ने कहा कि मरीज की हालत बिगड़ने या उपचार के दौरान मृत्यु होने मात्र से चिकित्सकीय लापरवाही साबित नहीं होती। हर मामले का आकलन तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने चिकित्सा अभिलेखों के रखरखाव, मरीज की सहमति और उपचार के जोखिमों की जानकारी देने पर जोर दिया। दूसरे सत्र में अधिवक्ता जितेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने चिकित्सकों के विरुद्ध हिंसा से जुड़े कानूनी प्रावधान बताए। वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार वाजपेयी ने कहा कि हिंसा के भय से चिकित्सकों पर मानसिक दबाव बढ़ता है, जिससे उपचार संबंधी निर्णय प्रभावित हो सकते हैं। प्राचार्य ने चिकित्सकों को कानूनी रूप से जागरूक बनाने के साथ सुरक्षित कार्य वातावरण देना जरूरी है। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सोनल अमित और डॉ. प्रसून सचान ने किया।