आपके नाम से मुंबई में अपराध हुआ है... आधार और बैंक खाते की जांच की जा रही है... सीबीआई की जांच में फंसे हुए हो... सहयोग नहीं किया तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। साइबर ठगों ने स्वरूपनगर निवासी डॉक्टर योगेश चंद्र मिश्रा को इसी तरह से डरा धमकाकर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। उनसे आरटीजीएस के माध्यम से 48.20 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
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स्वरूपनगर के शयनिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 101 के रहने वाले 65 वर्षीय डॉक्टर योगेश चंद्र मिश्रा ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि 10 सितंबर 2026 की दोपहर 2:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया। उसने कहा कि डॉक्टर के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मुंबई के तिलकनगर में धमकी भरी कॉल, अश्लील सामग्री और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया है। इस नंबर के खिलाफ मुंबई में प्राथमिकी दर्ज होने की बात भी कही गई।
कॉलर ने अपना नाम रवि शर्मा और कोड आईडी बताई। इसके बाद व्हाट्सएप पर कई दस्तावेज भेजे। इनमें इंटरपोल और सीबीआई से संबंधित बताए गए दस्तावेज भी शामिल थे। सरकारी एजेंसियों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर डॉक्टर को यह विश्वास दिलाया गया कि वह गंभीर जांच में फंस चुके हैं। पीड़ित के अनुसार इसके बाद कॉल अन्य लोगों को ट्रांसफर की गई। उन्होंने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया। उन्हें गंभीर आपराधिक मामले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी गई। इससे वह डर गए।
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ठगों ने डॉक्टर की उम्र अधिक होने का हवाला देते हुए उन्हें घर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पूछताछ में शामिल होने की बात कही। इसी बहाने तीन दिन तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर अपने निर्देशों के मुताबिक रखा गया। इसके बाद जांच के नाम पर आरबीआई खाते में रकम जमा कराने का झांसा देकर 48 लाख 20 हजार 500 रुपये आरटीजीएस करा लिए गए। रकम भेजने के बाद ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
कमरे से बाहर न निकलने की दी गई हिदायत
ठगों ने डॉक्टर को किसी परिजन या अन्य व्यक्ति से संपर्क न करने की हिदायत दी। कमरे से बाहर न निकलने और मोबाइल पर किसी दूसरे व्यक्ति से बातचीत न करने के लिए कहा गया। गिरफ्तारी की आशंका और लगातार पूछताछ के दबाव के बीच डॉक्टर ठगों की बताई बातों का पालन करते रहे। इसके बाद ठगों ने जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के खिलाफ हुई कार्रवाई का हवाला देकर डॉक्टर को एक और जाल में फंसाया। दावा किया गया कि कार्रवाई में बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में डॉक्टर का आधार नंबर और उनके बैंक खाते में 40 लाख रुपये की रकम प्राप्त होने का उल्लेख मिला है।
जांच पूरी होते ही रुपये वापस भेजने का दिया झांसा
ठगों ने डॉक्टर से कहा कि जांच के उद्देश्य से उनके बताए बैंक खाते में रकम आरटीजीएस करनी होगी। रकम को आरबीआई खाते में जमा कराने की बात कही गई। भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के 24 से 72 घंटे के भीतर रकम वापस कर दी जाएगी। गिरफ्तारी के डर और ठगों के बनाए दबाव में डॉक्टर ने अपने एसबीआई स्वरूपनगर के बैंक खाते से 48,20,500 रुपये उनके बताए बैंक ऑफ इंडिया खाते में आरटीजीएस कर दिए।
बेटी और दामाद तक से नहीं किया जिक्र
साइबर इंस्पेक्टर अभय सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी, आईटीएक्ट और जालसाजी में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शातिर ठग बुजुर्ग से और रकम ऐंठना चाहते थे। इस पर उन्होंने बैंक जाकर रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी कर ली थी। समय रहते तत्काल उसपर बैंक के अधिकारियों को सूचना कर ट्रांजेक्शन पर रोक लगाई गई। ठगों के द्वारा डिजिटल अरेस्ट के कारण बुजुर्ग इतने दहशत में थे कि वह अपार्टमेंट के छठवें फ्लोर में रहने वाली अपनी बेटी और दामाद से भी घटना का जिक्र नहीं कर सके।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
- कोई पुलिस, सीबीआई, इंटरपोल, बैंक या सरकारी अधिकारी बन फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो सतर्क हो जाएं।
- परिवार या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत जानकारी दें।
- रकम ट्रांसफर हो गई है तो तत्काल 1930 पर शिकायत करें।
- बैंक को सूचना देकर रकम होल्ड कराने का अनुरोध करें।
- मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट और बैंक ट्रांजेक्शन सुरक्षित रखें।
क्या न करें
- किसी अधिकारी के कहने पर किसी निजी खाते में रकम जमा न करें।
- ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी साझा न करें।
- अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयर या संदिग्ध एप डाउनलोड न करें।