अस्पताल की सीढ़ियों पर तलवार लेकर बैठा आरोपी डॉक्टर
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जालौन जिले के कुठौंद क्षेत्र में प्राइवेट अस्पताल चला रहे डॉक्टर ने महिला के साथ छेड़खानी कर दी। महिला ने विरोध किया तो डॉक्टर ने उसके पिता और पति के साथ न सिर्फ मारपीट की बल्कि तलवार दिखाते हुए जान से मारने की धमकी भी दी।
पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस अस्पताल पहुंची तो आरोपी डॉक्टर फरार हो गया। इंस्पेक्टर अरुण तिवारी का कहना है कि आरोपी डॉक्टर के खिलाफ छेड़खानी की रिपोर्ट दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि बुधवार की रात मदारीपुर में डॉक्टर रजत चौहान के डीके नाम के प्राइवेट अस्पताल में एक महिला अपने पिता और पति के साथ पहुंची। पिता ने बताया कि मायके आई बेटी के सिर में दर्द था, इस कारण उसे लेकर अस्पताल पहुंचे थे।
पहले तो डॉक्टर ने उन्हें और दामाद को अस्पताल से बाहर खड़ा करा दिया। इसके बाद बेटी को भीतर ले जाकर उसके साथ छेड़खानी शुरू कर दी। बेटी के शोर मचाने पर वह भी दामाद के साथ भीतर पहुंचे तो देखा कि डॉक्टर शराब के नशे में धुत था।
छेड़खानी का विरोध किया तो रजत ने मारपीट शुरू कर दी। इतना ही नहीं भीतर के कमरे से तलवार निकालकर तीनों को धमकाया कि किसी से शिकायत की तो अंजाम ठीक नहीं होगा। पिता के मुताबिक इसके बाद वे तीनों सीधे थाने पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी।
फोर्स अस्पताल पहुंची तो आरोपी डॉ. रजत वहां से फरार हो चुका था। इंस्पेक्टर का कहना है कि आरोपी कानपुर का रहने वाला बताया जा रहा है। उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। साथ ही उसकी डिग्री की भी जांच कराई जाएगी। मौके से पानी और कीचड़ के बीच डॉक्टर के कपड़े भी पड़े हुए मिले हैं।
बिकरू कांड की चर्चा करता था
ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि रजत कानपुर का रहने वाला था, तीन साल पहले ही उसने पुष्पेंद्र के मकान में किराए पर एक हिस्सा लेकर डीके नाम से अस्पताल खोला था। जब से बिकरू कांड हुआ था, तब से वह तीमारदारों से स्वयं को कानपुर का बताकर कांड की चर्चा जरूर करता था।
अस्पताल की तलाशी भी ली जाएगी
कुठौंद पुलिस का कहना है कि रजत कानपुर में कहां का रहने वाला है, यह अभी पता नहीं चल सका है। अस्पताल में तलवार निकलना समझ से परे है। अधिकारियों से अनुमति लेकर अस्पताल की तलाशी का भी प्रयास किया जाएगा, ताकि यह पता लग सके कि कहीं और भी असलहे तो वहां नहीं रखे हैं।
स्वास्थ्य विभाग भी कराएगा जांच
सीएमओ अल्पना बरतरिया का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं था, फिर भी वह डीके अस्पताल की जांच कराएंगी, इसके अलावा जल्द ही गांव कस्बों में इस तरह प्राइवेट अस्पताल चलाने वाले डॉक्टरों की चेकिंग का भी अभियान शुरू कराएंगी, ताकि मरीजों के साथ ऐसी अभद्रता दोबारा न हो सके।