कानपुर। इलाज में लापरवाही से एक 18 साल के युवक की बाईं आंख की रोशनी चली जाने पर उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष विनोद कुमार ने हॉस्पिटल और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर को 45 दिन में इलाज का खर्च 85 हजार रुपये परिवादी को लौटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही क्षतिपूर्ति के लिए चार लाख रुपये और वाद व्यय के रूप में दस हजार रुपये भी भुगतान करने होंगे। मुकदमा दाखिल करने की तारीख से भुगतान की तारीख तक सात प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
जाजमऊ निवासी आमिर सिद्दीकी की बाईं आंख में 13 जनवरी 2009 को एयरगन का छर्रा लग गया था। आमिर ने माल रोड निवासी डॉ. आशीष महेंद्रा को स्वरूपनगर स्थित क्लीनिक पर दिखाया तो उन्होंने तुलसी हॉस्पिटल में भर्ती कर ऑपरेशन कर दिया। इसमें कुल 12,495 रुपये खर्च आया। 15 जनवरी को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद आमिर लगातार डॉ. आशीष से इलाज कराता रहा। डॉ. आशीष ने दोबारा स्वरूपनगर स्थित आरके देवी मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कर 13 फरवरी को ऑपरेशन किया।
इसमें कुल 20,500 रुपये लिए गए। आश्वासन दिया गया कि जल्द ही रोशनी वापस आ जाएगी, लेकिन रोशनी पूरी तरह से चली गई। इलाज में लापरवाही पर आमिर के अधिवक्ता मनीष शर्मा ने डॉ. आशीष महेंद्रा, आरके देवी मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रबंधक के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में परिवाद दर्ज किया था। अधिवक्ता ने बताया कि वर्तमान में आमिर एक राष्ट्रीयकृत बैंक में अधिकारी हैं। डॉक्टर व हॉस्पिटल को लगभग 4.20 लाख रुपये ब्याज सहित कुल नौ लाख से ज्यादा रकम का भुगतान आमिर को करना होगा।