लोग झोलाछाप या खुद ही मेडिकल स्टोर जाकर एंटीबायोटिक दवाएं लेकर न खाएं। इससे रोगाणुओं में एंटी बायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और फिर छोटे से छोटे संक्रमण में भी एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं करती है। जिससे रोग गंभीर हो जाता है।
यह स्थिति ऐसे समय में और अधिक गंभीर हो जाती है जब प्रदूषण के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। यह बात कानपुर में सीनियर फिजिशियन डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कार्यशाला में बताई। साथ ही डाक्टरों को भी सलाह दी कि वे मरीजों को एंटीबायोटिक की उतनी ही डोज लिखें जितनी जरूरत है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले कार्यशाला का आयोजन आर्यनगर स्थित एक क्लब में किया गया। कार्यशाला में डॉ. रस्तोगी ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त किए। इसके पहले उन्होंने पत्रकारों से भी बात की। डॉ. रस्तोगी ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी की है कि एंटी बायोटिक रिसेस्टेंस ग्लोबल इमरजेंसी होने जा रहा है।