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जानिए कितना हानिकारक हो सकता है बिना डॉक्टर की सलाह लिए एंटीबायोटिक दवाएं खाना

Mon, 24 Jun 2019 01:22 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डॉक्टरों ने दी जानकारी - फोटो : अमर उजाला
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लोग झोलाछाप या खुद ही मेडिकल स्टोर जाकर एंटीबायोटिक दवाएं लेकर न खाएं। इससे रोगाणुओं में एंटी बायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और फिर छोटे से छोटे संक्रमण में भी एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं करती है। जिससे रोग गंभीर हो जाता है।
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यह स्थिति ऐसे समय में और अधिक गंभीर हो जाती है जब प्रदूषण के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। यह बात कानपुर में सीनियर फिजिशियन डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कार्यशाला में बताई। साथ ही डाक्टरों को भी सलाह दी कि वे मरीजों को एंटीबायोटिक की उतनी ही डोज लिखें जितनी जरूरत है। 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले कार्यशाला का आयोजन आर्यनगर स्थित एक क्लब में किया गया। कार्यशाला में डॉ. रस्तोगी ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त किए। इसके पहले उन्होंने पत्रकारों से भी बात की। डॉ. रस्तोगी ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी की है कि एंटी बायोटिक रिसेस्टेंस ग्लोबल इमरजेंसी होने जा रहा है।
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अभी एंटी बायोटिक रिसेस्टेंस से साल में दुनिया भर में सात लाख मौतें होती हैं। वर्ष 2050 तक इन मौतों का आंकड़ा प्रति वर्ष एक करोड़ तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि डाक्टर एंटी बायोटिक, किसी बीमारी में सही समय और सही खुराक में दें।

फंगल संक्रमण, वायरल संक्रमण, साइनस, फ्लू, ब्रोंकाइटिस आदि रोगों में एंटी बायोटिक की जरूरत नहीं होती। अस्पतालों ने एंटी बायोटिक पॉलिसी प्रोग्राम बनाया है जिसमें डाक्टरों को बैक्टीरिया के संबंध में जागरूक किया जाता है।

इस तरह घटाया जा सकता बैक्टीरियल संक्रमण
- घर और शरीर की सफाई रखें।
- बाहर से आने पर साबुन से हाथ जरूर धोएं।
- खाना खाने के पहले और बाद में हाथ धोएं।
- शौच के बाद अच्छी तरह से हाथ-पैर साफ करें।
- बासी खाना, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ आदि न खाएं।
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