कानपुर। मुरारीलाल अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर जिलाधिकारी ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से स्पष्टीकरण तलब किया है। यहां सांस और टीबी रोगी अगल-बगल के दो कमरों की ओपीडी में देखे जा रहे हैं। इससे सामान्य सांस रोगियों के लिए भी टीबी के संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है।
शुक्रवार को अस्पताल की पड़ताल की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होेने के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्टीकरण मांगा है। पड़ताल में सामने आया था कि रोगियों को टूटी व्हीलचेयर दी जा रही हैं। पूरे भवन में सीलन और कहीं-कहीं प्लास्टर और टाइल्स उखड़कर गिर रहे हैं। रोगियों ने बताया था कि बाथरूम के दरवाजे टूटे, पॉट में पाइप नहीं लगा है। बाथरूम के नीचे वाले तल पर बने दवा स्टोर तक में पानी जा रहा है। डीएम ने मामले में जांच कराने की बात भी कही। प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि मुरारीलाल अस्पताल में व्यवस्था सुधारने के लिए हमने 49 करोड़ के नए भवन बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। इसमें टीबी व सामान्य सांस रोगियों के लिए ओपीडी अलग-अलग होंगी। वार्ड भी अलग-अलग बनाए जाएंगे।
शनिवार को मुरारीलाल अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर चर्चा रही लेकिन प्राचार्य डॉ. संजय काला ने हैलट का ही निरीक्षण किया। वे हैलट की हर यूनिट, पंजीकरण, फार्मेसी, इमरजेंसी, ओपीडी, पैथोलॉजी और वार्डों का निरीक्षण करने गए लेकिन वे मुरारीलाल अस्पताल नहीं पहुंचे। हैलट में उन्होंने स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि रोगियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो लेकिन मुरारीलाल के रोगियों का हाल नहीं जाना।