यूपी के कन्नौज जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर किस तरह से खेल हो रहा है, यह जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने शुक्रवार को आंखों से देख लिया। रक्तदान शिविर के उद्घाटन के बाद जिलाधिकारी ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया।
एक्स-रे रूम के बाहर लोगों की भीड़ लगी थी। रजिस्टर मंगाकर पड़ताल की तो पता चला कि अभी तक पुरानी रिपोर्ट ही मरीजों को नहीं मिलीं। इस पर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने सभी टेक्नीशियन को फटकार दिया।
महिला डॉक्टर के बाहर से दवा लिखने पर डीएम ने स्पष्टीकरण लेने के निर्देश सीएमएस को दिए हैं। बदइंतजामी पर डीएम बोले, अस्पताल को आप लोगों ने नरक बना रखा है। सुधर जाओ, यह लास्ट वार्निंग है, नहीं तो निपट जाओगे।
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले डीएम बाल रोग विभाग में पहुंचे। अंदर गर्मी होने पर एसी चेक किया तो ठंडी हवा नहीं आ रही थी। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। वार्ड में एक और एसी लगवाने के निर्देश सीएमएस यूसी चतुर्वेदी को दिए।
यहां से निकले तो ककवन के रामविलास शिकायत लेकर आ गए। उन्होंने कहा, तीन दिन पहले पत्नी सरोज ने बच्ची को जन्म दिया है। बच्ची को कानपुर जच्चा-बच्चा अस्पताल रेफर किया गया है। पत्नी तेज बुखार से पीड़ित है। बुधवार से ब्लड टेस्ट कराने के लिए भटक रहे हैं। अभी तक सैंपल नहीं लिया गया।
इस पर डीएम ने सीएमएस से नाराजगी जताई। इसके बाद अस्पतालकर्मी सक्रिय हुए। वह रामविलास को उसकी पत्नी का ब्लड टेस्ट कराने के लिए ले गए। डीएम आगे बढ़े तो कन्नौज ब्लॉक के तिखवा निवासी मुकेश पुत्र रामविलास ने शिकायत की।
इन्होंने बताया कि उन्हें जो दवाएं लिखी गईं, वह जन औषधि केंद्र में नहीं हैं। कई दिनों से कई किमी दूर से आ रहे हैं। दवाएं नहीं मिल रही हैं। इस पर डीएम जन औषधि केंद्र पहुंच गए। यहां 1000 में सिर्फ 500 दवाएं ही मिलीं। उन्होंने इंचार्ज अजीत द्विवेदी को निर्देश दिए कि स्टाक रिपोर्ट इंचार्ज के साथ भेजें।