कानपुर देहात। धनतेरस पर सुबह से ही बाजार गुलजार रहे। सुबह से लेकर रात तक जमकर खरीददारी हुई। सर्राफा, बर्तनों और इलेक्ट्रानिक्स की दुकानों पर अधिक भीड़ रही। बाइक, कार, ट्रैक्टर, साइकिल की बिक्री भी ठीक रही। कई दुकानदारों ने लोगों के लिए आकर्षक स्कीमें रखी थी।
शुक्रवार को धनतेरस पर बजारों में सुबह से ही दुकानें सजाई गई थी। सुबह तो बाजारों में कम ग्राहक नजर आए, लेकिन शाम ढलते ही ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी। शाम को मन पसंद वस्तुएं लेने के लिए लोग दुकानों में पहुंचे। अधिकांश लोगों ने स्टील और एल्यूमीनियम के बर्तन खरीदे। कुछ लोगों ने सर्राफा की दुकानों में पहुंचकर चांदी और सोने के आभूषण व सिक्के खरीदे। फर्नीचर व इलेक्ट्रानिक्स दुकानों में भी बिक्री हुई। दुकानदार रोहन द्विवेदी ने बताया कि नई डिजाइन में सोफा, अलमारी व कुर्सियां लोगों की विशेष पसंद रहीं। इस वर्ष बाजार में खरीददारी अच्छी हुई। बाइक और ट्रैक्टर के शो-रूम भी आकर्षक ढंग से ग्राहकों को लुभाने के लिए सजाए गए थे। ग्राहकों को लुभाने के लिए आकर्षक स्कीम भी दी जा रही थी। शाम को शुभ मुहूर्त देख लोगों ने वाहन खरीदे। बाइक शो-रूम के मालिक श्याम ओमर और संतोष ओमर ने बताया 805 बाइकें बिकी। अधिकांश लोगों ने फाइनेंस के बदले नगद अधिक खरीदी हैं। विजय गुप्ता ने बताया कि उनके शो-रूम से 15 ट्रैक्टर खरीदे गए हैं। ममता अवस्थी ने बताया कि उनके शोरूम से तीन सौ बाइकों की बिक्री हुई है। मैनेजर शोभित दीक्षित ने बताया कि कारों की बिक्री में इस वर्ष कुछ कमी रही। उनके शो-रूम से 50 कारों की बिक्री हुई है। बर्तन दुकानदार जगदीश ने बताया कि ग्राहकों ने स्टील के बर्तन अधिक खरीदे। सर्राफ छोटे कौशल और महेश कौशल ने बताया कि चांदी के सिक्कों की मांग अधिक रहीं है। सोने के आभूषण भी खरीदे गए। ऋषि गुप्ता ने बताया कि एलईडी टीवी, वासिंग मशीन, फ्रिज की बिक्री खूब हुई है। दीपावली के पूजन का सामान और गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां खरीदी गईं। झाडू व झालरें भी खरीदी गई। पुखरायां प्रतिनिधि के मुताबिक शुक्रवार को कस्बे के अलावा, मूसानगर, बरौर, शाहजहांपुर का बाजार सुबह से ही सज गया। कस्बा में आसपास से आए ग्रामीणों ने धनतेरस पर जमकर खरीददारी की। बर्तन की दुकानों पर देर रात तक भीड़ बनी रही। लोगों ने स्टील, पीतल, तांबा के बर्तन खरीदे। सर्राफा व्यवसायी राजकुमार गोयल ने बताया कि पिछले बार की अपेक्षा इस बार लोगों ने सोने की अपेक्षा चांदंी की ज्यादा खरीददारी की है। ब्रिटिश शासनकाल के सिक्के 750 रुपये और अन्य चांदी की सिक्के की रेंज 250 से पांच हजार रुपये तक रही। बरौर प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे का बाजार गुलजार रहा। बर्तन विक्रेता शैलेंद्र द्विवेदी और सुशील गुप्ता ने बताया कि खरीफ की फसल सही न होने के चलते बीते सालों की अपेक्षा बाजार में कम रौनक रही। लोगों ने आनलाइन शापिंग भी की। लोहिया नगर निवासी रोहित सचान ने बताया कि आनलाइन बाजार में मार्केट से कम कीमत में सामान मिल जाता है।