कानपुर देहात। मड़ौली गांव में किसान की हत्या से हड़कंप है। गांव के पूर्व प्रधान और उसके भाई किसान की सवा बीघा जमीन हड़पने के प्रयास में लगे थे। वर्ष 2012 में किसान के घर में घुसकर मारपीट करने के साथ फायरिंग की गई थी। तब पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। पूर्व प्रधान की दबंगई से किसान का परिवार गांव छोड़कर कानपुर के मसवानपुर में जाकर रहने लगा था।
मड़ौली गांव के किसान नत्थू पाल की हत्या के बाद गांव में बेटा मनोज पहुंचा। उसने बताया कि गांव के पूर्व प्रधान कमलेश कुशवाहा का परिवार बड़ा है। वह नौ भाई हैं। सभी गांव में दबंगई करते हैं। उसकी सवा बीघा जमीन हड़पने के लिए वह लोग आए दिन मारपीट और जान से मारने की धमकी देते रहते थे। 2012 में कमलेश प्रधान थे। तब उसके घर में घुसकर मारपीट करने के साथ फायरिंग की थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी पुलिस से सांठगांठ होने से कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इससे पूरा परिवार दहशत में आ गया था। नत्थू के चार बेटे विनोद, मनोज, सुघर पाल व बब्लू हैं। बब्लू को छोड़कर सभी विवाहित हैं। मनोज ने बताया कि पूरा परिवार गांव में दबंगई से आजिज आकर कानपुर रहने लगा था। नत्थू फसल की देखरेख के कारण गांव आते रहते थे।
नत्थू को पहले से अपनी हत्या की आशंका थी। तभी वह गांव में अकेले नहीं आता था। ज्यादातर अपनी पत्नी को लेकर ही गांव आता था। पत्नी को लेकर ही खेत पर जाता था। घटना के बाद पत्नी बिटान को इसका मलाल रहा कि वह पत्नी की जान नहीं बचा सकी। हत्यारों ने उसके सामने ही पति की हत्या कर दी। वह कई बार बेसुध हुई। होश आने पर बिलखने लगती।
मड़ौली गांव के किसान नत्थू बाजारा की फसल की कटाई और मड़ाई के लिए पत्नी को लेकर एक सप्ताह पहले गांव आया था। बेटे मनोज ने बताया कि वह घर में कहकर आए थे कि धनतेरस के दिन वापस आएंगे। सुबह उनकी मौत की खबर पहुंची। इससे परिवार में कोहराम मच गया। सभी बिलखने लगे। दीपावली की खुशियां मातम में बदल गईं।
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