फतेहपुर दोआबा की यह सरजमीं भले ही विकसित और महानगरीय जिलों की श्रेणी में नहीं आ पाई लेकिन देश की सियासत में इसकी मजबूत दखल रही है। देश का पहला प्रधानमंत्री चुनने का मौका रहा हो या फिर अपनी संसदीय सीट से संसद में भेजकर प्रधानमंत्री बनाने का। यह दोनों ही गौरव जिले को प्राप्त हो चुका है। यह जरूर है कि फतेहपुर जिले को जो आर्थिक व सामाजिक मजबूती मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी है।
आइए एक नजर डालते हैं फतेहपुर की इस मजबूत राजनीतिक दखल की
फतेहपुर जिला वैसे तो कानपुर महानगर से महज 80 किलोमीटर की दूरी पर है। व्यापारिक और सामाजिक सरोकार भी इसी ओर ज्यादा है। पर, जब बात प्रशासनिक देखरेख और निर्णय की आती है तो इसे इलाहाबाद महानगर की ओर देखना पड़ता है। इसकी कमिशभनरी इलाहाबाद है, जो यहां से 120 किलोमीटर दूर है। जिले के लोग पिछड़ेपन के लिए इसे भी एक मजबूत वजह मानते हैं। कानपुर और इलाहाबाद जैसे दो बड़े महानगरों के बीच बसा फतेहपुर जनपद भले ही विकास में अभी कुछ खास नहीं कर सका है। अलबत्ता यहां का सियासी चेहरा समय-समय पर अपनी छाप छोड़ने में सफल रहा है। बात करें देश के सबसे पहले आम चुनाव की तो वर्ष 1952 में जिले का खागा तहसील का किशनपुर क्षेत्र इलाहाबाद जिले के फूलपुर व चायल संयुक्त संसदीय क्षेत्र मेें शुमार था। इस फूलपुर संसदीय सीट में जिले की किशनपुर विधानसभा पूरी शामिल थी। राजनीति के जानकार खागा निवासी बुजुर्ग ओम द्विवेदी बताते हैं कि तब यहां के लोग दो सांसद चुनते थे। संसदीय क्षेत्र से पं. जवाहर लाल नेहरू व चायल सुरक्षित संसदीय क्षेत्र से मसुरिया दीन कांग्रेस से उम्मीदवार थे। इन दोनोें को किशनपुर की जनता ने वोट किया था। जिसमें पं. जवाहर लाल नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री चुना गया। इसके बाद वर्ष 1957 के चुनाव में फिर चाचा नेहरू जीतकर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रिपीट हुए। मसुरियादीन भी जीते। करीब एक दशक तक किशनपुर विधानसभा, पड़ोसी जिले इलाहाबाद की फूलपुर-चायल संसदीय सीट का हिस्सा बनी रही। वर्ष 1962 में फूलपुर और चायल दो अलग-अलग संसदीय सीट बनी। किशनपुर चायल से हटकर फतेहपुर संसदीय सीट में शामिल हो गई जबकि खागा विधानसभा चायल संसदीय सीट में शामिल हुई। वर्ष 1989 में तो पूरे जिले को देश के लिए प्रधानमंत्री बनाने का तमगा हासिल हुआ। तब फतेहपुर संसदीय सीट से राजा मांडा विश्वनाथ प्रताप सिंह यहां से चुनाव लड़े और जीतकर प्रधानमंत्री बने। बता दें कि बाद में 2012 में नया परिसीमन हुआ जिसमें खागा विधानसभा फतेहपुर संसदीय सीट में समाहित कर ली गई।