मैंने बिठूर उत्थान समिति का गठन किया है, जो इस तरह के मामलों की निगरानी करेगी। विहिप के मठ-मंदिर प्रमुख गणेश शंकर ने कहा कि आश्रम को गलत हाथों में नहीं जाने देंगे। समिति के संयोजक अनिल द्विवेदी ने कहा कि आश्रम व्यक्तिगत पूंजी नहीं होती। एनजीओ को आश्रम में चलाना अनुचित है। ये आश्रम के व्यवसायीकरण का संकेत है।
आरोप निराधार, शव का हुआ था पोस्टमार्टम
स्वामी ब्रजानंद अवधूत के आरोपों पर डॉ. रेनू ने कहा कि स्वामी प्रकाशानंद जी बीमारी से ग्रसित थे। उनके फेफड़े खराब हो गए थे। हैलट में इलाज कराया गया था। डॉक्टरों की सलाह पर उनको वापस आश्रम लाया गया था। 10 मई की शाम सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली थी। तब पुलिस को सूचना देकर अगले दिन शव का पोस्टमार्टम कराया गया था।
डॉ. रेनू ने दूसरे पक्ष के आरोपों को पूरी तरह से निराधार करार दिया। साथ ही कहा कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं। उधर, स्वामी ब्रजानंद का कहना है कि स्वामी प्रकाशानंद की इच्छा थी कि आश्रम में ही उनकी समाधि बनाई जाए, लेकिन शरीर को समाधि स्थल पर नहीं रखा गया। डॉ. रेनू ने बताया कि बिठूर शमशान घाट पर भूसमाधि दी गई थी।
दोनों पक्षों की तरफ से प्रार्थनापत्र दिए गए हैं। दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं। राजस्व और अन्य विभागों की मदद से इन दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। साक्ष्यों के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा। - दिनेश कुमार शुक्ला, एसीपी कल्याणपुर