गंगा प्रदूषण मसले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने एक बार फिर जल निगम को नकारा घोषित किया है। कहा गया है कि विभाग पिछले कई वर्षों से गंगा में नालों का कचरा रोकने के लिए सिर्फ प्लान बना रहा है। एक बार फिर से नालों के डायवर्जन की योजना तैयार की गई है। इस बार भी कुछ होने की संभावना नहीं दिख रही है।
विभागीय अधिकारी कभी केंद्र सरकार तो कभी प्रदेश सरकार से अनुमति नहीं मिलने का रोना रोते आ रहे हैं। एनजीटी ने छह महीने के अंतराल में दूसरी बार जल निगम की कार्य प्रणाली को बेकार बताया है। ट्रिब्युनल ने कहा है कि निगम के अधिकारी गंगा प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं हैं। अधिकारियों से गंगा में गिरने वाले नालों की फिर से रिपोर्ट मांगी गई है।
यह है स्थिति
24.7 करोड़ लीटर गंदा पानी शहर से गंगा में रोजाना गंगा में जा रहा है।
63.17 करोड़ रुपये से सीसामऊ, म्योर मिल नाला, नवाबगंज सहित छह नाले टैप करते हुए डायवर्ट किए जाने हैं।
23 नालों से गंगा में गिर रहा प्रदूषित कचरा।
6 नालों को ही डायवर्ट किए जाने की बनाई जा रही योजना।
21 करोड़ लीटर वाले एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से जोड़ा जाएगा सीसामऊ नाला
3.6 करोड़ लीटर वाले जाजमऊ एसटीपी से जोड़े जाएंगे बाकी नाले
3 साल पहले टेप किए गए नालों से भी गिर रहा गंगा में कचरा