लखनऊ का आतंकी और बंथरा (उन्नाव) से पकड़े गए इमरान काफी करीबी हैं। इमरान सोमवार को भोपाल और मंगलवार सुबह लखनऊ से शहर लौटा था। सूत्रों की मानें तो एटीएस, पुलिस और खुफिया से पूछताछ में इमरान और उसके भाई फैसल ने सिमी और आईएसआईएस से जुड़े लोगों से रिश्ते होने की बात कबूली है।
पुलिस दोनों भाइयों से पुखरायां, रूरा रेल हादसे और मंधना में पटरी काटे जाने की घटना की भी लिंक तलाश रही है। सूत्रों के मुताबिक चकेरी (जाजमऊ) के तिवारीपुर ताड़बगिया में पांच साल पहले रहने आए इमरान पिछले दिनों मध्य प्रदेश गया था। सोमवार को मध्य प्रदेश से शहर लौटा था। मंगलवार को एमपी में भोपाल-उज्जैन एक्सप्रेस में धमाका हो गया।
मंगलवार सुबह ही वह लखनऊ में छिपे आतंकी से मिलकर लौटा था। उसकी एमपी और लखनऊ में रहने के दौरान भाई फैसल से लगातार मोबाइल पर कई बार बातचीत भी हुई थी। दोनों की लखनऊ और एमपी में पकड़े गए आतंकियों से भी बातचीत हुई थी। इसी आधार पर एटीएस और पुलिस ने दोनों भाइयों को पकड़ा है।
भोपाल-उज्जैन पैसेंजर में हुए धमाके से दोनों भाइयों का जुड़ाव होने की बात सामने आने के बाद एटीएस कानपुर में हए रेल हादसों को भी इन्हीं से जोड़कर देख रही है। दोनों भाइयों से पुलिस इन घटनाओं का लिंक तलाश रही है। पकड़े गए भाइयों का किस आतंकी संगठन से संबंध है। यह अभी साफ नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि इमरान और फैसल के आईएसआई और आईएसआईएस से जुड़े लोगों से रिश्ते हैं।
दुकानदारों पर एफआईआर की तैयारी
रहमानी मार्केट में अजहर एंड ग्रो टेलीकॉम के शकील को छुड़ाने वाले दुकानदारों पर एफआईआर की तैयारी है। पुलिस हिरासत से शकील को छुड़ाने वालों से अफसर खफा हैं। सूत्रों की मानें तो आला अफसर भी शकील के हाथ निकलने से खफा हैं। पुलिस ने हंगामा करने वाले लोगों की पहचान के लिए अपने खास लोगों को लगा दिया है।
रेल हादसों के बारे में पूछताछ, कई एजेंसियां पहुंचीं
कानपुर (ब्यूरो)। संदिग्ध इमरान और फैसल से पुखरायां और रूा रेल हादसे व मंधना में रेल पटरी काटे जाने के बारे में जांच एजेंसियों ने सवाल पूछे हैं। कुछ लिंक भी मिला है, लेकिन अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। देर रात एनआईए, यूपी और एमपी एटीएस, आईबी के साथ ही देश और प्रदेश की तमाम एजेंसियां दोनों से पूछताछ करने देर रात शहर पहुंच गईं।
इन हादसों ने बढ़ाया शक
बता दें कि 20 नवंबर को कानपुर-झांसी ट्रैक पर पुखरायां रेलवे स्टेशन के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस पलटी। इसमें 152 यात्री मारे गए। 300 से ज्यादा घायल हुए। इसके बाद 28 दिसंबर को कानपुर-दिल्ली ट्रैक पर रूरा रेलवे स्टेशन के पास सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस पलटी जिसमें 52 यात्री घायल हुए। इसके बाद 31 दिसंबर की रात कानपुर के पास मंधना में फर्रुखाबाद पैसेंजर के आने से पहले पटरी काटी गई थी और 50 पैंड्राल क्लिपें निकाल दी गईं थीं।12 जनवरी के कानपुर के पास शुक्लागंज में कानपुर-लखनऊ ट्रैक पर मालगाड़ी पलट गई थी। इसमें भी पैंड्राल क्लिपें निकालने की आशंका जताई गई थी। कानपुर के आस-पास अलग-अलग रेल रूटों पर लगातार हो रहे हादसे भी किसी साजिश की आशंका को बल देते हैं। रूरा रेल हादसे की जांच एनआईए और रेलवे की टीम कर रही है। अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि रूरा में ट्रेन हादसे का शिकार हुई थी या आतंकी साजिश का शिकार। वहीं, मंधना रेल हादसे की जांच बिठूर पुलिस और आरपीएफ कर रही है। इस मामले में भी पुलिस अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। एटीएस और पुलिस अफसरों को पकड़े गए इरफान और फैसल से इन घटनाओं के सुराग हाथ लगने की उम्मीद है।