पिंटू सेंगर हत्याकांड में आरोपी अधिवक्ता दीनू उर्फ धीरज कुमार उपाध्याय और उसके 12 साथियों को लेकर एडिशनल सीपी हरीश चंदर का सभी थाना प्रभारियों को भेजा गया पत्र पुलिस के गले की फांस बन गया है। दीनू की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मदनपाल सिंह की दो सदस्यीय खंडपीठ ने पुलिस कमिश्नर और एडिशनल पुलिस कमिश्नर से चार जून को इस संबंध में अपना व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।
एडिशनल सीपी कानून एवं व्यवस्था रहे हरीश चंदर ने 30 अप्रैल को जिले के सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित करते हुए पत्र लिखा था। इसमें कहा था कि दीनू और उसके 12 साथियों पर नजर रखें। यदि इनके द्वारा कोई छोटी से छोटी घटना भी कारित की जाती है तो तत्काल विधिक कार्रवाई करके जानकारी दें। इसी पत्र को लेकर दीनू की ओर से हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई।
दीनू के अधिवक्ता सुशील शुक्ला की ओर से तर्क रखा गया कि आपराधिक न्यायशास्त्र में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत यह पत्र लिखा गया हो। यह पत्र दीनू की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए लिखा गया प्रतीत होता है। जानकारी मिली है कि यह पत्र पुलिस कमिश्नर के दबाव में एडिशनल सीपी द्वारा जारी किया गया। अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर और एडिशनल सीपी दोनों को आगामी चार जून को अपना व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसमें यह बताने को कहा है कि किस परिस्थिति में जिले के सभी पुलिस थानों को यह पत्र भेजा गया था।