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Kanpur News: एंबुलेंस का मुखौटा ओढ़कर दौड़ रहे जर्जर वाहन

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कानपुर। जर्जर वाहन में हूटर लगाया और आगे-पीछे साइन बनाते ही एंबुलेंस तैयार हो गई। इन वाहनों में न तो एंबू बैग होता है, न ऑक्सीजन सिलिंडर हैं और न ही मेडिकल किट। स्वास्थ्य विभाग के मानकों को पूरा न करने वाले ऐसे जर्जर वाहनों पर रोगियों की सांसें बचाने का जिम्मा है। हैलट, कार्डियोलॉजी के अलावा रावतपुर, स्वरूप नगर और कल्याणपुर के कुछ निजी अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस का मुखौटा ओढ़कर जर्जर वाहन खड़े रहते हैं। शहर में बेधड़क दौड़ रहे इन वाहनों पर स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। आरटीओ भी सुध नहीं ले रहा है।
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एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर, एंबू बैग, अग्निशमन सिलिंडर, वार्मिंग लाइट, सक्शन पंप, बीपी मापक, स्ट्रेचर, सायरन, सर्जिकल ग्लब्स, डिस्पोजल संक्शन पंप, ड्रिप सेटर, रुई, बीटाडाइन, मास्क, ओआरएस, दवाओं के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ का होना आवश्यक है।
12:50 बजे कार्डियोलॉजी के बाहर ऑटो स्टैंड की तरह एंबुलेंस खड़ी थीं। चालक आने-जाने वाले रोगियों और तीमारदारों से पूछ रहा था कि वैन तो नहीं चाहिए।
2:05 बजे हैलट के बाहर एक एंबुलेंस रोगी को लेकर जा रही थी। एंबुलेंस में न तो ऑक्सीजन सिलिंडर था और न ही कोई अन्य मानक पूरे मिले। अंदर मेडिकल किट, स्ट्रेचर, अग्निशमन यंत्र नहीं था और जगह-जगह से गले वाहन पर कई जगह वेल्डिंग की गई थी।
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वर्जन
जर्जर एंबुलेंस अगर चल रही हैं तो अभियान चलाकर कार्रवाई करेंगे। तीन से चार दिन तक लगातार अभियान चलाकर मानकों की जांच की जाएगी। इसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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- राहुल श्रीवास्तव, आरटीओ प्रवर्तन
वर्जन
एंबुलेंस के मानक की जांच करने के बाद ही पत्र जारी किया जाता है। अगर आरटीओ कोई अभियान चलाता है तो सहयोग होगा किया जाएगा। - डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमओ
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