स्वरूपनगर पुलिस ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में हुए डीजल घोटाले में पेट्रोल पंप मालिक और केयर टेकर विभाग के तत्कालीन तीन जूनियर इंजीनियर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। केडीए में अगस्त 2017 से दिसंबर 2019 के बीच डीजल की ज्यादा खपत दिखाकर दो करोड़, 15 लाख 57 हजार रुपर्ये इंधन उपलब्ध करने वाली फर्म में ट्रांसफर कर दिए गए थे।
जिसके मालिक शैलेंद्र अग्रवाल हैं। उनका मेसर्स इंजीनियर्स सर्विस, स्टेशन अधिकृत विक्रेता इंडियन ऑयल, कार्पोेरेशन लिमिटेड के नाम से बेनाझाबर रोड पर पेट्रोल पंप है। घोटाले की शिकायत नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जलकल कर्मचारी समन्वय संघ के अध्यक्ष बचाऊ सिंह ने तत्कालीन कमिश्नर और जिलाधिकारी से की थी।
डीएम ने अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) बसंत लाल को जांच सौंपी थी। उनकी जांच में केयर टेकर विभाग में तैनात रहे तत्कालीन तीन जूनियर इंजीनियर कमेंद्र सिंह, असत अली सिद्दीकी, रविंद्र प्रकाश दोषी पाए गए हैं। वहीं पेट्रोल पंप मालिक शैलेंद्र अग्रवाल की भी घोटाले में भूमिका मिली है।
वह कोई भी ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके कि उनके खाते में अधिक भुगतान कैसे पहुंचा। लिहाजा जांच में पेट्रोल पंप मालिक को भी दोषी माना गया। थानाप्रभारी अश्विनी कुमार पांडेय ने बताया कि केयर टेकर विभाग के सुनील कुमार तिवारी की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
डीजल घोटाले में कई अफसर भी जांच के दायरे में
स्वरूप नगर पुलिस ने केडीए में हुए करोड़ों के डीजल घोटाले की जांच शुरू कर दी है। कर्मियों के साथ ही कई अफसर भी जांच के दायरे में आ रहे हैं। इसे लेकर सोमवार को विकास प्राधिकरण में तरह - तरह की चर्चाएं होती रहीं, पर अफसर जांच का हवाला देकर चुप्पी साधे रहे। विकास प्राधिकरण के कुछ कर्मियों का कहना है कि निष्पक्ष जांच होने पर कई अधिकारियों की भी लिप्तता उजागर हो सकती है।
क्योंकि डीजल के भुगतान तक में अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। इसलिए उनकी भी जवाबदेही होनी चाहिए। उनकी सहमति के बिना इतना बड़ा घोटाला कैसे संभव हो सकता है? उधर, केडीए के निवर्तमान वीसी राकेश कुमार सिंह ने आरोपी केयरटेकर असत अली सिद्दीकी, रवींद्र प्रकाश, कर्मेंद्र सिंह के निलंबन की संस्तुति शासन से की थी। साथ ही एक सुपरवाइजर और एक माली को निलंबित किया था।
बिजली आती रही, कागजों में चलता रहा जनरेटर
रिकार्ड की पड़ताल में पता चला कि जब केस्को से विद्युत आपूर्ति होती रही, उस समय भी कागजों में जनरेटर चलना लिखकर भुगतान किया गया। इतना ही नहीं किसी - किसी दिन दफ्तर खुलने से लेकर बंद होने तक भी जनरेटर चलना दिखाया गया। जबकि प्राधिकरण में सोलर प्लांट भी लगा है।
जनरेटर से चलते रहे बंगलों के एसी
केडीए के जनरेटर से दफ्तर के पीछे की तरफ स्थित कई अफसरों के बंगलों के भी एसी चलते रहे। जनरेटर से ही कुछ लोगों को अवैध कनेक्शन दिए गए, पर इसका उल्लेख डीजल खपत संबंधी रिकार्ड में नहीं किया गया था।