कानपुर के हीरा कारोबारी उदय देसाई ने 14 बैंकों के 3635 करोड़ रुपये डुबो दिए हैं। इन बैंकों में इनकी आधा दर्जन कंपनियों के दर्जन भर से अधिक खाते एनपीए हो गए हैं। पेन किंग विक्रम कोठारी के बाद बैंकों का पैसा डुबाने का यह दूसरा सबसे बड़ा मामला है।
उदय देसाई की कंपनियों मैसर्स फ्रास्ट इंटरनेशनल लिमिटेड व फ्रास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर व एनर्जी लिमिटेड समेत कई कंपनियों ने वर्ष 2002 से 2010 के बीच तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का लोन लिया। वर्षों तक लोन की किस्तें ठीक चलने और लगातार लिमिट बढ़ने के बाद वर्ष 2018 में इनके खाते एनपीए होने लगे।
वर्तमान में इनके 14 बैंकों में इतने ही खाते एनपीए हो चुके हैं। लगातार डिमांड नोटिस जारी करने के बाद भी इनकी कंपनियों से लोन की रकम वापस नहीं हुई तो बैंकों ने सख्ती शुरू की। अब बैंक ऑफ इंडिया ने मुंबई, कानपुर और गुड़गांव स्थित संपत्तियों को कब्जे में ले लिया है। कई संपत्तियां अभी जब्त होने की स्थिति में हैं और कई नीलामी की प्रक्रिया में चल रही हैं।