डेरापुर। जनपद में संचालित निजी चिकित्सालयों और नर्सिंग होम की एंबुलेंस सेवाओं को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सख्ती दिखाई है। सीएमओ ने सभी निजी चिकित्सालयों व नर्सिंग होम संचालकों को अपने यहां संचालित एंबुलेंस और उनमें कार्यरत ईएमटी व चालक से संबंधित अभिलेख सात दिन के भीतर कार्यालय में उपलब्ध कराने को कहा है।
सीएमओ डॉ. जय गोविंद की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि मरीजों को आकस्मिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित एंबुलेंस की स्थिति, उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों तथा उसमें कार्यरत एंबुलेंस कर्मियों की योग्यता एवं अभिलेखों का सत्यापन कराया जाना आवश्यक है। इसके लिए प्रत्येक एंबुलेंस से संबंधित निर्धारित अभिलेख प्रमाणित प्रतियों के साथ उपलब्ध कराने को कहा गया है। निर्देशों में एंबुलेंस का पंजीयन प्रमाणपत्र (आरसी), फिटनेस प्रमाणपत्र, वैध बीमा, पीयूसी प्रमाणपत्र, परमिट सहित अन्य परिवहन संबंधी अभिलेख मांगे गए हैं।
इसके अलावा एंबुलेंस के प्रकार और उसमें उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों का विवरण, ईएमटी/पैरामेडिक का नाम, पता, मोबाइल नंबर व फर्स्ट एड प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, संबंधित पंजीकरण प्रमाणपत्र, पायलट/चालक का विवरण और वैध ड्राइविंग लाइसेंस की प्रति भी मांगी गई है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वैध अभिलेखों, निर्धारित योग्यता वाले ईएमटी/पैरामेडिक और अधिकृत चालक के बिना एंबुलेंस का संचालन नहीं किया जाएगा। अभिलेख प्राप्त होने के बाद सक्षम अधिकारी द्वारा उनकी जांच व सत्यापन किया जाएगा।
आवश्यकता पड़ने पर एंबुलेंस का भौतिक निरीक्षण भी कराया जाएगा। निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने पर नियमानुसार आवश्यक प्रमाणपत्र या संस्तुति की कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने चेतावनी दी है कि अधूरे, गलत या भ्रामक अभिलेख अथवा सूचना प्रस्तुत किए जाने पर संबंधित चिकित्सालय या नर्सिंग होम संचालक की जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एंबुलेंस के पंजीयन, फिटनेस और परमिट से संबंधित कार्रवाई में परिवहन विभाग के वर्तमान नियमों व निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।