कानपुर देहात। औद्योगिक क्षेत्र रनियां के खानचंद्रपुर व इसके मजरों में क्रोमियम, मर्करी व फ्लोराइड जैसे भारी तत्वों की जांच को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। लोगों की सेहत पर पड़ रहे असर की जानकारी करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमों ने करीब 250 परिवारों की विस्तृत जानकारी जुटाई है। साथ ही भारी तत्वों की स्थिति पता लगाने के लिए 336 लोगों के रक्त व पेशाब के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। टीम को स्क्रीनिंग के दौरान लोग गैर संचारी रोग, त्वचा संबंधी रोग से पीड़ित मिले हैं। अब डॉक्टर सर्वे रिपोर्ट से बीमारी की वजह खोजने के प्रयास में जुटे हैं।
सरवनखेड़ा पीएचसी अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार यादव ने बताया कि एनजीटी के निर्देश पर 16 से 25 मार्च तक रनियां पीएचसी अधीक्षक डॉ. विशाल भसीन के नेतृत्व में नौ-नौ सदस्यीय तीन टीमों ने क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में खानचंद्रपुर, पालपुरवा, चौहानपुरवा, यादवपुरवा, उमरन, घारमपुर व रनियां के चार वार्ड में स्क्रीनिंग, रक्त व पेशाब के नमूने जुटाए हैं। स्क्रीनिंग के दौरान टीमों की ओर से 250 घरों की विस्तृत जानकारी जुटाई गई है। इसमें घर के सदस्यों में बीमारी, पीने के पानी की उपलब्धता, धूम्रपान का सेवन सहित चार पन्नों की रिपोर्ट तैयार की गई है।
सर्वे के दौरान लोगों में एनजाइटी, शुगर, ब्लड प्रेशर, खुजली, पेट दर्द आदि की समस्याएं मिलीं है। किसी भी व्यक्ति में क्रोमियम, मर्करी, फ्लोराइड आदि भारी तत्वों से होने वाले प्रभाव के लक्षण नहीं मिले हैं। टीम की ओर क्रोमियम व मर्करी की जांच के लिए नमूने डॉ. राम मनोहर लोहिया शिक्षण संस्थान लखनऊ व फ्लोराइड की जांच के लिए एम्स रायबरेली नमूने भेजे गए हैं। ज्यादातर नमूने परिवार के उन सदस्यों के लिए गए हैं जो पूर्व से किसी बीमारी से पीड़ित हैं। स्क्रीनिंग पूरी होने के बाद अब टीमों की ओर से लोगों के बीमार पड़ने की वजह को पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं जांच के लिए भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट आने का भी इंतजार किया जा रहा है।
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सर्वे में इन बिंदुओं पर जुटाई गई जानकारी
सरवनखेड़ा पीएचसी अधीक्षक डॉ. राकेश यादव ने बताया कि टीम की ओर से प्रत्येक घर में पानी, स्वास्थ्य, धूम्रपान सेवन, फैक्टरी सीवेज से घर की दूरी आदि की जानकारी जुटाई गई है। इसके साथ ही पीने के पानी का स्रोत, कब से इस पानी का प्रयोग कर रहे हैं। पीने से पहले पानी उबालते, फिल्टर करते हैं या नहीं। जल स्रोत से फैक्टरी का सीवेज कितनी दूर है। पूर्व में पानी की जांच की गई है या नहीं आदि जानकारी जुटाई।
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स्वास्थ्य को लेकर इन बिंदुओं पर रखा गया ध्यान
लोगों के स्वास्थ्य जुड़ी जानकारी में, सिर दर्द, थकान, कमजोरी, वजन घटना या बढ़ना, अनिद्रा, त्वचा पर दाने, खुजली, त्चवा का रंग में बदलाव, अल्सर, उल्टी आना, पेट दर्द, डायरिया, अपच, हाथों में झनझनाहट होना, मांसपेशियां कमजोर होना, याददाश्त कमजोर होना, चिढ़चिढ़ापन, जोडों में दर्द, पैरों में सूजन, पेशाब का रंग बदलना, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारी, खून की कमी, घातक बीमारी व दिव्यांगता आदि बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी ली गई। वहीं, बच्चों में वजन घटना, भूख न लगना, बुखार, त्वचा संबंधी रोग, विकास की स्थिति आदि की जानकारी ली। इसके अलावा लोगों की ओर से पूर्व में क्रोमियम, मर्करी, फ्लोराइड, आर्सेनिक, लेड, एलएफटी, केएफटी, ब्लड शुगर की जांच करवाई है या नहीं आदि की जानकारी जुटाई गई है।
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ऐसे घुल गए लोगों के शरीर में भारी तत्व
रनियां में खानचंद्रपुर-मटियामऊ मार्ग पर करीब 20 साल तक लगभग 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम अपशिष्ट डंप रहने से भूजल दूषित हो गया। मामले में एनजीटी के निर्देश के बाद जिम्मेदारों की ओर से क्रोमियम जैसे घातक तत्व का किश्तों में उठान करवाया गया। इसके बावजूद भी डंप स्थल में रह गए मिट्टी मिश्रित क्रोमियम में देरी रही। इधर डंप स्थल पर हुए कई फीट गहरे गड्ढे में बारिश का पानी भर गया है। यह पानी समय के साथ भूजल में जा रहा है। यहां तक कि रनियां में क्रोमियम से होने वाले नुकसान में घातक स्थान बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले तीन माह से करवाई गई खानचंद्रपुर व उमरन के लोगों की खून की जांच में सभी के खून में मानक से अधिक क्रोमियम पाया गया था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनवरी माह में पालपुरवा के 104 लोगों की जांच के लिए नमूने भेजे थे। रिपोर्ट में सभी 104 लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम पाया गया है। जबकि 29 लोगों में मानक से अधिक फ्लोराइड व दो में मर्करी पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाकर रनियां के चार वार्ड से 120 लोगों के रक्त व पेशाब के नमूने लेकर जांच करवाई थी। इसमें भी सभी लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम पाया गया था।
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वर्जन............
स्वास्थ्य टीम की ओर से क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में किए गए सर्वे में लोगों में गैर संचारी रोग व त्वचा संबंधी रोग से पीड़ित लोग मिले हैं। इनकी स्थिति सुरक्षित स्थान पर रहने वाले बीमार लोगों की तरह है। सर्वे के दौरान की गई शुगर, बीपी आदि अन्य महत्वपूर्ण जांच में कुछ लोग ऐसे मिले जिन्हें अपनी बीमारी का ही पता नहीं था। इन लोगों का इलाज शुरू किया गया है। अब लोगों की बीमारी की वजह पता लगाने के लिए प्रत्येक परिवार की सर्वे रिपोर्ट का अध्यन किया जा रहा है। जल्द ही रिपोर्ट का अध्ययन पूरा कर बीमारी की वजह खोजी जाएगी। - डॉ. राकेश यादव, पीएचसी अधीक्षक सरवनखेड़ा