कानपुर। ड्रग विभाग की ओर से कानपुर और वाराणसी दोनों पुलिस को विनोद अग्रवाल के खिलाफ समान तथ्य उपलब्ध कराए जाने के बावजूद, वाराणसी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अग्रवाल पर कार्रवाई की जबकि कानपुर पुलिस अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। यदि कानपुर पुलिस भी यही तत्परता दिखाती तो प्रेमा और मसाईको जैसे मामलों में भी कड़ी कार्रवाई हो सकती थी।
ड्रग विभाग ने चार महीने पहले कानपुर पुलिस को जो तथ्य दिए थे वही तथ्य वाराणसी पुलिस को एक महीने पहले सौंपे। वाराणसी पुलिस को शैली ट्रेडर्स के पास मिली नशीली सिरप की 90 हजार बोतलों को अग्रवाल ब्रदर्स के संचालक की ओर से बेचे जाने की जानकारी मिली। इसके साक्ष्य मांगने पर ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि 15 अक्तूबर के बाद अग्रवाल ने प्रयागराज की एम के हेल्थकेयर को 90 हजार कोडीन सिरप की बोतलें बेची थीं, जबकि उस समय उन पर नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री पर रोक लगी थी। एम के हेल्थकेयर ने ये दवाएं शैली ट्रेडर्स को बेचीं, जहां से ये बांग्लादेश में तस्करी के लिए भेजी जा रही थीं।
सूत्रों के अनुसार, विनोद अग्रवाल का नाम मिर्जापुर के चुनार में भी नशीली दवाएं बेचने के मामले में सामने आ रहा है। वहां उन्होंने विंग्स बायोटेक्स से खरीदी 30 हजार बोतलों को अगस्त 2025 में बेचा था। मिर्जापुर पुलिस ने भी इस संबंध में ड्रग विभाग से जानकारी मांगी है, लेकिन विभाग के पास इसके पुख्ता साक्ष्य नहीं हैं।