उन्नाव में किसान विकास पत्र का भुगतान करने के बदले दस हजार रुपये घूस मांग रहे उप डाकघर प्रभारी को सीबीआई की एसीवी (एंटी करप्शन विंग) ने छह हजार रुपये घूस रंगे हाथ लेते पकड़ लिया। कई घंटे पूछताछ और अभिलेखों की जांच के बाद टीम उसे अपने साथ लखनऊ ले गई है।
हसनगंज तहसील मुख्यालय पर कोतवाली के पास स्थित उप डाकघर में क्षेत्र के लालपुर गांव निवासी देशराज की मां रूपरानी पत्नी मंगली प्रसाद ने 24 सितंबर 2007 में 66 हजार रुपये का किसान विकास पत्र लिया था। 2014 को रकम दो गुनी होकर मिलनी थी, लेकिन 2012 में रूपरानी की बीमारी से मौत हो गई थी।
बेटे देशराज के मुताबिक उसने 17 जनवरी 2019 को उप डाकघर के प्रभारी सुशील शर्मा से धनराशि निकालने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। देशराज के अनुसार उसे किसान विकास पत्र से 1.32 लाख रुपये और 41 माह का अतिरिक्त ब्याज मिलना था। आरोप है कि पहले वरासत साबित करने के लिए उसे बार बार दौड़ाया गया। इसके बाद उससे 10 हजार रुपये घूस मांगी।
एक परिचिति ने उसे सीबीआई का एक मोबाइल नंबर दिया जिसपर उसने डाकघर प्रभारी की शिकायत की। गुरुवार को सीबीआई की एसीवी (एंटी करप्शन विंग) के इंस्पेक्टर आरएन सिरोटिया के नेतृत्व में 12 सदस्यीय टीम सुबह ही उप डाकघर के पास पहुंच गई। 9:30 बजे डाकघर खुला।
करीब 10 बजे सीबीआई अधिकारियों के इशारे पर देशराज घूस के रूप में पाउडर लगे नोट छह हजार रुपये उप डाकघर प्रभारी सुशील शर्मा को थमाए। उसके नोट जेब में रखते ही पहले से मौजूद सीबीआई की टीम ने उसे दबोच लिया। करीब तीन घंटे तक डाकघर प्रभारी, सहायक व अन्य कर्मचारियों से पूछताछ के बाद टीम डाकघर प्रभारी सुशील शर्मा को लखनऊ हजरतगंज स्थित कार्यालय लेकर चली गई।
शाम करीब पांच बजे टीम फिर वापस आई और डाकघर से कई दस्तावेज निकलवाने के बाद रात करीब आठ बजे डाकघर प्रभारी सुशील शर्मा को अपने साथ लेकर फिर लखनऊ लौट गई। सीबीआई के इंसपेक्टर आरएन सिरोटिया ने मीडिया को कुछ भी जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि वह अपनी रिपोर्ट केवल दिल्ली मुख्यालय को देने के लिए अधिकृत हैं। मुख्य डाक अधीक्षक आरएस शर्मा ने बताया कि वह विभागीय कार्य से लखनऊ में थे। उन्हें सीबीआई के इंस्पेक्टर ने फोन पर इसकी जानकारी दी है। वह अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को देंगे।