कानपुर। जिले के परिषदीय स्कूलों के छात्रों को पढ़ाई के साथ भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें हुनरमंद बनाया जा रहा है। जिले के 53 चुनिंदा स्कूलों के कक्षा छह से आठ तक के छात्रों को कर के सीखो (लर्निंग बाय डूइंग) कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए स्कूलों को सभी तरह के उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।
छात्रों को भविष्य में रोजगार के लिए भटकना न पड़े जैसी मंशा के साथ शासन के निर्देश पर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को शुरू किया गया है। इसमें छात्रों को कृषि, बागवानी, स्वास्थ्य और घर से जुड़े कई क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले 155 तरह के उपकरणों का इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है। इनमें इंजीनियरिंग तकनीक से जुड़े 63, पर्यावरण, ऊर्जा से जुड़े 44, कृषि एवं बागवानी के 35 और लैब सेटअप से जुडे़ 13 उपकरण शामिल हैं। इन्हें शासन की ओर से भेजा गया है। इन उपकरणों के अलावा सुई-धागा, फावड़ा, खुरपी, बीज, कुकर, मिक्सर ग्राइंडर और बाल्टी आदि को जिले स्तर पर ही खरीदने के लिए 24,770 रुपये दिए गए हैं। इस प्रशिक्षण के लिए वर्तमान में 11 ब्लॉक के चार-चार यानी 44 विद्यालयों का चयन किया गया था। बाद में इसमें पीएम श्री योजना के तहत पांच और पायलट प्रोजेक्ट योजना के चार विद्यालय शामिल किए गए हैं। यह सभी विद्यालय या तो उच्च प्राथमिक हैं या फिर कंपोजिट। इनमें छात्रों की संख्या सौ से अधिक है और विद्यालय में पानी, बिजली, बाउंड्री, शौचालय आदि के मानक पूरे हैं।
एक अप्रैल को जिलाधिकारी ने मसवानपुर स्थित विद्यालय से कार्यक्रम की शुरूआत की थी। अभी चयनित विद्यालयों में वहीं के गणित या विज्ञान के शिक्षकों को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए इन शिक्षकों को लखनऊ में प्रशिक्षण दिया गया था। भविष्य में यह प्रशिक्षण तकनीकी अनुदेशकों से दिलाने की योजना है। यह छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने की अच्छी पहल है। - सुरजीत सिंह ,बीएसए