कानपुर। इंजीनियरिंग की तकनीक अब मशीन, रोबोट और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बीमारी की पहचान, इलाज और मरीजों की निगरानी में भी इसकी भूमिका बढ़ेगी। मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका में 22 सितंबर को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), कैम्ब्रिज के वोंग ऑडिटोरियम में फेस-2026 के तहत फ्यूचर ऑफ मेडिसिन सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें दुनिया के कई बड़े चिकित्सा और तकनीकी विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल अपनी टीम के साथ यूएसए दौरे पर हैं। कार्यक्रम में उनके साथ संस्थान के प्रो. जयंधरन जी. राव और गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. अनिल के. लालवानी शामिल होंगे। चर्चा में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉ. जयेंद्र जगदीसन, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रो. सुनील के. अग्रवाल, पूर्व आईसीएमआर महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव और आर्टोस की मिहिका जैन भी भाग लेंगी।
कार्यक्रम में आईआईटी कानपुर में विकसित हो रहे गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी को मजबूत करने की दिशा पर विस्तार से मंथन होगा। विशेषज्ञ एआई, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, मेडिकल डिवाइस, जीन और सेल आधारित तकनीक तथा मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के इस्तेमाल से इलाज को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे।
छात्रों और शोधार्थियों के लिए खुलेंगे सहयोग के अवसर
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से संवाद से आईआईटी कानपुर के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मेडिकल क्षेत्र में हो रहे नए शोध और तकनीकी विकास की जानकारी मिलेगी। विदेशी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ संयुक्त शोध परियोजनाओं, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और नई मेडिकल तकनीकों पर सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।