कानपुर। आईआईटी कानपुर की मदद से अब दिल्ली में कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी है। बढ़ते प्रदूषण को देखते दिल्ली सरकार ने इसके लिए आईआईटी से संपर्क किया है। पहले कृत्रिम बारिश जुलाई के पहले सप्ताह में कराने की तैयारी थी, जिसे अब अगस्त में कराया जाएगा। इसके लिए आईआईटी के वैज्ञानिकों ने दिल्ली जाकर कई बार निरीक्षण भी किया है।
आईआईटी कानपुर ने प्रदूषण व सूखे से निपटने के लिए 2017 में शोध शुरू किया था। इसमें संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक व पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल की टीम ने क्लाउड सीडिंग तकनीक से कृत्रिम बारिश कराने में सफलता प्राप्त की है। प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार ने उनसे कृत्रिम बारिश कराने के लिए संपर्क किया है।
पहले जुलाई में बारिश कराई जानी थी, लेकिन वहां अभी बारिश हो रही, इस वजह से इसे अगस्त में कराया जाएगा। कृत्रिम बारिश के लिए भी बादलों का होना जरूरी है। बारिश के लिए जिन बादलों को सक्रिय करना होता है, उनमें पहले से कुछ नमी यानी जलीय वाष्प मौजूद होना चाहिए। बारिश के बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से गिरेगा और दिल्ली वासियों को राहत मिलेगी।
ऐसे होती है कृत्रिम बारिश
प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि कृत्रिम बारिश के लिए सिल्वर आयोडाइड, नमक जैसे कई केमिकल को मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद एक विमान की विंग में उपकरण लगाकर इस मिश्रण को भरा जाता है। विमान से बादलों के बीच जाकर फायर के साथ केमिकल का छिड़काव करने से बारिश होती है।