कन्नौज। इत्र कारखाने के बॉयलर में धमाका इतना तेज था कि इसके टुकड़े हवा में उड़ते हुए करीब 100 मीटर दूर कांशीराम कॉलोनी की दीवारों में जा धंसे। गहरी नींद में सो रहे लोगों में भगदड़ मच गई। बिजली के तार टूटने से अंधेरा छा गया। घबराए हुए लोग बाहर निकले तो हवा में झूलते तार और लोहे के बड़े-बडे़ टुकड़े देख दंग रह गए। उन्हें लगा शायद आसमान से कोई हेलीकॉप्टर गिर गया है। बाद में जब कारखाने से चीखने की आवाजें आईं तो पता चला कि हादसा हुआ है। राजमिस्त्री रामकुमार ने बताया कि पोल हिलने से तारों में स्पार्किंग हुई और बिजली गुल हो गई।
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राजेश कुमार
दिन में होता हादसा, तो कई की जाती जान
कांशीराम कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि कॉलोनी टाइप-10 में उनके सामने राशन की दुकान में करीब तीन क्विंटल का टुकड़ा आकर धंस गया। इसके अलावा जगह-जगह लोहे के टुकड़े गिरे आकर। रात को सन्नाटा था। अगर दिन में यह हादसा होता, तो लोगों की जान जा सकती थी।
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रेहान
बस्ती के पास से हटाए जाएं कारखाने
कॉलोनी में रहने वाले रेहान ने बताया कि इत्र कारखाने शहर में जगह-जगह खुल गए हैं। बॉयलर फटने से लोग दहशत में हैं। बस्ती से कारखानों को औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित कराया जाए।
नसीम
जिंदगी में पहली बार सुना इतना तेज धमाका
नसीम ने बताया कि रात करीब एक बजे इतनी तेज धमाका हुआ कि नींद टूट गई। कई लोग घरों से बाहर आ गए। करीब आधे घंटे तक किसी को कुछ समझ में नहीं आया। उन्होंने पहली बार इतनी तेज धमाका सुना।
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धनीराम
बिजली के तारों से बचे मकान
धनीराम ने बताया कि बॉयलर का करीब तीन क्विंटल टुकड़ा इतनी तेज उछला कि बिजली के तारों को तोड़ते हुए खंभों को भी टेढ़ा कर गया। अगर बिजली के पोल से टुकड़ा न टकराता तो कॉलोनी की छत पर गिरकर बड़े हादसे का कारण बन सकता था।
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शकुंतला देवी
मान लेता बेटा बात, तो न देखना पड़ता यह दिन
हादसे में गंभीर रूप से झुलसे सुनील की मां शकुंतला देवी ने जब कारखाने में फटे बॉयलर को देखा, तो वह बेसुध हो गई। उसने कहा कि एक साल पहले पूवे चेयरमैन के ईदगाह वाले कारखाने में बड़ा बेटा सुशील मजदूरी करता था। 50 हजार रुपये उधार कर लिए थे। पूर्व चेयरमैन ने एक माह काम करने पर पुराना हिसाब करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने सुनील को काम करने से मना किया था, लेकिन बकाया मिलने के लालच में वह नए कारखाने में काम करने आने लगा।
दो बार चेयरमैन रहे हाजी रईस, पूर्व सीएम अखिलेश के हैं करीबी
हाजी रईस अहमद ने कम समय में इत्र कारोबार के क्षेत्र और राजनीति में बड़ी पहचान बना ली है। 2001 में वह बसपा से नगर पालिका का चुनाव लड़कर चेयरमैन बने थे। इसके बाद 2006 में भी बसपा से चेयरमैन चुने गए। इसके बाद से वह समाजवादी पार्टी में सक्रिय हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव के बेहद करीबी हैं। मौजूदा समय शहर के बड़े इत्र कारोबारियों में उनकी पहचान है। जानकारों के मुताबिक, पहले हाजी रईस आम आदमी की तरह सामान्य काम करते थे। वर्ष 2001 से राजनीति और इत्र कारोबार के जरिये पहचान हासिल की है।