समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान में फंसे नेता और कार्यकर्ताओं के लिए शुक्रवार दिन खास होगा। चुनाव आयोग मुलायम और अखिलेश गुट के बीच पार्टी सिंबल आवंटित होने या फ्रीज करने को लेकर फैसला करेगा। अगर पार्टी दो धड़ों में बंटी तो बीच का रास्ता अख्तियार करने वाले नेता अपने पत्ते खोल देंगे। इसमें खासकर वह नेता होंगे, जो किसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
कानपुर नगर क्षेत्र की आर्य नगर, छावनी और गोविंद नगर विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेता शुक्रवार को अपनी चाल खोलने लगेंगे। जिसका पलड़ा अखिलेश गुट में भारी हुआ, वह वफादार बनने की कोशिश करेगा। जिसे मायूसी होगी, वह मुलायम शिवपाल गुट में अपनी आस्था जताएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इसमें उन लोगों का नुकसान भी हो सकता है, जिन्होंने अपनी आस्था किसी एक गुट में जता दी है और वहां पर चुनाव लड़ने वाले उस गुट के समर्थक दावेदार ज्यादा हैं। आर्य नगर विधानसभा सीट पर समीकरण बन बिगड़ सकता है। यहां पर शिवपाल यादव ने रीता जितेंद्र बहादुर सिंह का टिकट काट दिया है। अखिलेश गुट की लिस्ट में भी इसे खाली ही दिखाया गया है। फिलहाल इस सीट पर नगर संगठन के एक बड़े नेता, नगर निगम से जुड़े पार्टी के बड़े नेता और फ्रंटल संगठन के पूर्व राष्ट्रीय नेता के बीच दावेदारी के लिए कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
इस विवाद में फिलहाल अपना हित साधने वाले नेता चाहते हैं कि दो फाड़ हो, जिससे उन्हें खुद को साबित करने का मौका मिल सके। जबकि पार्टी का पुराना वर्कर चाहता है कि मुलायम और अखिलेश एक साथ रहें। कई दिनों से चल रहे इस राजनीतिक रहस्य से शुक्रवार को पर्दा उठ सकता है।