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UP: मां को पानी देकर गई थी मासूम...सफेद कफन में लौटी; शरीर पर जख्म देख पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की कांप गए

Tue, 09 Sep 2025 03:40 PM IST
शाहरुख खान मुशर्रफ खां, अमर उजाला, बांदा

सार

तीन वर्षीय मासूम से अपहरण कर दुष्कर्म और हत्या करने वाले को विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने सोमवार को फांसी की सजा सुनाई है। आदेश में न्यायाधीश ने लिखा है कि अभियुक्त को मृत होने तक फांसी पर लटकाया जाए।
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दोषी सुनील - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बांदा के चिल्ला थाना इलाके के एक गांव में तीन साल की मासूम सोहर में पड़ी अपनी मां को पानी देकर निकली थी। इसके बाद सफेद कफन में ही लौटी। दोषी को फांसी की सजा सुनाए जाने पर गांव भर में जश्न का माहौल है। इस फैसले से पूरे गांव के लोगों और मासूम के माता-पिता के दिल को ठंडक मिली है।
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न्यायालय परिसर में मौजूद मासूम की मां ने रोते हुए बताया कि घटना वाले दिन तीन जून को वह सोहर में थी। घटना के एक सप्ताह पहले उसको बेटा हुआ था। तीन जून को तीन बजे दोपहर में उसकी बेटी अपनी छोटी सी बाल्टी में घर के बाहर लगे हैंडपंप से पानी भरकर लाई थी और बोली थी कि मां पानी पी लेना और बउवा को भी पिला देना। 

उसके बाद वह खेलने चली गई थी। इसके बाद वह बेटी का मुंह नहीं देख पाई। जब न्यायालय ने सुनील निषाद को फांसी की सजा सुनाई तो उनके दिल को सुकून मिला। अब वह घर जाकर दीया जलाएंगी।
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बता दें कि दो सितंबर को पैलानी तहसील प्रशासन ने सुनील निषाद के पिता लोटन प्रसाद का घर जोकि ग्रामसमाज की जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया था, उसे ढहा दिया था।

जख्म देखकर पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर की भी कांप गई थी रूह
बांदा के चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव में तीन साल की मासूम के साथ दरिंदे सुनील निषाद ने इस तरह दरिंदगी की थी कि उन जख्मों को डॉक्टर भी नहीं टांके लगाकर सिल सके। यह बात न्यायालय में बयान के दौरान कानपुर हैलट की पोस्टमार्टम डॉक्टर अनीता कुमारी ने न्यायालय को अपने बयान कही थी। 

 

उन्होंने न्यायालय को बताया था कि बच्ची का पोस्टमार्टम करते समय उसके शरीर के जख्मों को देखकर उनकी रूह कांप गई थी। बच्ची के शरीर के जख्म उसके साथ हुई हैवानियत की कहानी बयां कर रहे थे। 

 

इसके अलावा फॉरेंसिक साक्ष्य जिसमें दोषी के खून से सनी शर्ट व पैंट, बर्फ रखने वाली पेटी, साइकिल और डीएनए जांच में भी दोषी के वारदात में शामिल होने की पुष्टि की थी।

पोस्टमार्टम और मेडिकोलीगल रिपोर्ट के आधार पर ही विशेष न्यायाधीश पाक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा ने इस अपराध को विरल से विरतम श्रेणी में रखते हुए दोषी को जघन्य अपराध का दोषी माना है।

तीन वर्षीय मासूम से दुष्कर्म और हत्या करने वाले को फांसी की सजा
तीन वर्षीय मासूम से अपहरण कर दुष्कर्म और हत्या करने वाले को विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने सोमवार को फांसी की सजा सुनाई है। आदेश में न्यायाधीश ने लिखा है कि अभियुक्त को मृत होने तक फांसी पर लटकाया जाए। न्यायाधीश ने 74 पन्ने के फैसले में लिखी टिप्पणी में इसे विरल से विरलतम अपराध बताया है। कोर्ट ने अन्य धाराओं में भी सजा समेत 65 हजार का जुर्माना भी लगाया है। अभियुक्त वारदात के बाद से जेल में निरुद्ध चल रहा था। फैसले के बाद उसे जेल भेजा गया है।

 

चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने तीन जून की रात 11 बजे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि शाम करीब चार बजे से उसकी तीन वर्षीय पुत्री को सुनील कुमार टॉफी देने का लालच देकर अपने घर ले गया था। इसके बाद से उसने बच्ची से गुटखा मंगाया था। तब से उसकी पुत्री लापता है। गांव वासियों के साथ उसने खोजबीन की, लेकिन पुत्री नहीं मिली। उसे आशंका है कि सुनील कुमार ने उसकी पुत्री को गायब कर दिया है।

 

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने रात में ही सुनील को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता के कपड़े बरामद करने के लिए पुलिस उसे घटनास्थल पर ले गई तो वहां उसने तमंचा छिपाकर रखा था। मौका पर उसने तमंचे से पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की तो गोली सुनील के पैर में लगी, जिससे वह घायल हो गया था।

पुलिस ने सुनील की निशानदेही पर बच्ची को जंगल से बरामद कर जिला। उसकी हालत गंभीर थी। पहले जिला अस्पताल फिर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले जाकर मेडिकोलीगल कराया गया, जिसमें उसके सात जाहिरा चोटें पाईं गईं थीं।

 

डॉक्टरों की सलाह पर बच्ची को कानपुर के हैलट में भर्ती कराया। हैलट में 12 जून को बच्ची की मौत हो गई थी। विवेचक ने 14 जून को आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। 11 गवाहों के बयान कराए गए थे। चार अगस्त को दोषी सुनील निषाद के भी बयान लिए गए थे। आठ अगस्त को बहस की गई।

दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने सुनील कुमार को मासूम के साथ दुष्कर्म करने, उसकी हत्या का रूप देने की धारा में उसे फांसी की सजा सुनाई है। फैसले के समय दोषी के माता-पिता अदालत में मौजूद थे। फांसी की सजा सुनने के बाद उनकी आंखों में आंसू छलक आए। इस दौरान कोर्ट परिसर में काफी संखया में पुलिस बल मौजूद रहा। पीड़ित पक्ष से मासूम की मां और नाना मौजूद थे।

फांसी की सजा सुन दहाड़े मारकर रोया वहशी सुनील
समाज को झकझोर देने वाले क्रूरतम अपराध करने वाले सुनील ने सोचा भी नहीं होगा कि उसे फांसी की सजा दी जाएगी। सोमवार को दोपहर दो बजे उसे अदालत में लाया गया। शाम 6:15 बसे से अधिक समय तक वह कठघरे में खड़ा रहा। 5:30 बजे उसे सजा सुनाई गई तो दहाड़े मारकर रो पड़ा। बाद में गुमसुम हो गया। वहीं, सजा सुनाए जाने के बाद मासूम की मां के चेहरे पर खुशी दिखाई दी।

चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव में तीन जून की शाम को 30 वर्षीय सुनील ने पड़ोस में घर के बाहर खेल रही तीन वर्षीय मासूम बच्ची से गुटखा मंगाया था। बच्ची गुटखा देने गई तो उसे दबोच लिया और उसके साथ दरिंदगी की। बाद में पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने तेजी जांच की और चार्जशीट को न्यायालय में पेश की। सोमवार को आरोपी को दोपहर दो बजे अदालत में लाया गया। कठघरे में रहने के दौरान उसके चेहरे पर बेचैनी दिखाई दी।

 

विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई। करीब 5:30 बजे फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सुनील दहाड़े मारकर रो पड़ा। थोड़ी देर रोने के बाद अपने आंसू पोछे और गुमसुम हो गया। कठघरे में अकेले मौजूद सुनील कभी फर्श पर बैठ जाता तो कभी खड़ा हो जाता।

 

किसी मददगार को खोजती रहीं निगाहें
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सुनील एकदम से बेचैन नजर आया। कभी कठघरे की ओर देखता तो कभी न्यायालय के अंदर मौजूद अधिवक्ताओं की तरफ। कारागार में रहने के दौरान उसने दाढ़ी नहीं बनवाई थी न ही बाल कटवाए थे। उसकी निगाहें किसी मददगार को खोजती नजर आईं।

 
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चार घंटे तक कठघरे में रहा सुनील
सुनील को दोपहर के समय जब पुलिस हिरासत में विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट की अदालत लेकर आई तो उसे कठघरे में खड़ा कर दिया गया। लगभग चार बजे तक सुनील के साथ कठघरे में मौजूद रहे सभी मुल्जिम जा चुके थे, सिर्फ सुनील बचा था। चार बजे के बाद दो घंटे तक सुनील कठघरे के अंदर अकेले रहा। करीब 5:30 बजे उसे सजा सुनाई गई। लगभग एक घंटे यानी 6:15 बजे पुलिस उसे बाहर निकालकर ले गई।
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