त्रुशा की कहानी
वर्ष 2010 में फर्रुखाबाद के जंगल से बाघिन त्रुशा और बाघ अभय को लाया गया था। 2017 तक दोनों की मेटिंग से 10 शावकों ने जन्म लिया था। इसके बाद पीलीभीत के जंगल से पकड़कर लाए गए आदमखोर बाघ प्रशांत और त्रुशा की मेटिंग कराई गई, तो 2017 में चार शावकों का जन्म हुआ।
वर्तमान में चिड़ियाघर में 10 बाघ हैं
इनका नाम अमर, अकबर, एंथोनी और अंबिका रखा गया। अदला-बदली स्कीम के तहत जोधपुर चिड़ियाघर में अंबिका, एंथोनी को भेज दिया गया था। अमर को गोरखपुर भेजा गया था। साल 2018 में अकबर की मौत हो गई थी। इसके बाद ये जोड़ी टूट गई। वर्तमान में चिड़ियाघर में 10 बाघ हैं, जिनमें चार नर और छह मादा हैं लेकिन एक भी मादा शावकों को जन्म नहीं दे सकी है।
त्रुशा ने अपनी औसतन उम्र से ज्यादा जीवन जीया। काफी वृद्ध थी। मुंह में कैंसर था, उसका इलाज चल रहा था। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। -नावेद इकराम, रेंजर चिड़ियाघर