उन्नाव के एक गांव में युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बुखार व खांसी आने से परिजनों ने कोरोना वायरस के लक्षण की आशंका जताते हुए स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी और शव नहीं उठाया। टीम के पहुंचने के बाद डॉक्टर ने लक्षण पूछे और एक महीने बाद कोरोना के लक्षण न होने की बात कही।
इसके बाद घर वालों ने शव का अंतिम संस्कार किया। बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव हसनापुर निवासी दुर्जन (45) पुत्र लक्ष्मण दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था। एक माह पहले स्वास्थ्य खराब होने पर वह दिल्ली से लौटकर घर आया था। घर आने के 10 दिन बाद उसकी हालत और बिगड़ गई।
कोरोना वायरस की दहशत में परिजन उसे सरकारी अस्पताल नहीं ले गए और झोलाछाप से इलाज कराते रहे। बुधवार को हालत बिगड़ने पर परिजन उसे मल्लावां के एक नर्सिंगहोम ले गए। वहां शाम तक रोकने के बाद वापस घर लेकर चले आए। गुरुवार को फिर उसकी हालत बिगड़ गई।
लेकिन जब तक परिजन उसे कहीं ले जाते उसने सुबह आठ बजे दम तोड़ दिया। कोरोना की दहशत से परिजनों ने शव नहीं उठाया। पीएचसी से डॉ. एसके सिंह टीम के साथ पहुंचे और मामले की जानकारी ली। परिजनों को समझाया कि इतने दिन बाद किसी प्रकार के वायरस नहीं पाए जाते। इसके बाद घर वाले ने शाम पांच बजे शव का नानामऊ गंगाघाट पर अंतिम संस्कार किया।