यूपी चुनाव के तीसरे चरण का मतदान होने जा रहा रहा है, लेकिन अब भी कई सीटें ऐसी है जहां पार्टियों में भितरघात चल रहा है। ऐसा ही आलम कानपुर महानगर और देहात जनपद की 14 विधानसभा सीटों में से कई सीटें पर कायम है। दरअसल, यहां जिन लोगों का ऐन वक्त पर टिकट काट दिया गया या फिर जो गठबंधन का शिकार हो गए, उनके सुर अपनी ही पार्टी के लिए बदल गए। ऐसे नेता या तो चुनाव प्रचार से बिल्कुल अलग हो गए या अपनी विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर किसी और विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी के साथ प्रचार में लग गए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि ऐसे दावेदारों की इसलिए दूसरी विधानसभा क्षेत्र में ड्यूटी लगा दी गई, जिससे वे अपने क्षेत्र के प्रत्याशी की गणित बिगाड़ने की साजिश न रच सकें।
भाजपा को खतरा
सपा-कांग्रेस गठबंधन के शिकार सपाइयों और कांग्रेस नेताओं की गतिविधियों से तो यह साफ दिखता भी है, लेकिन भाजपा में यह सब अंदर ही चल रहा है। सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से टिकट के प्रबल दावेदार रहे पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी का टिकट कटने के बाद चर्चा है कि वह सीसामऊ क्षेत्र में प्रत्याशी सुरेश अवस्थी के प्रचार में नजर नहीं आ रहे हैं। इस बाबत जब नीरज से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पार्टी ने उनकी ड्यूटी किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र में लगाई है। इसी तरह किदवई नगर से भाजपा के टिकट के दावेदार रहे पूर्व प्रत्याशी विवेकशील शुक्ल के विषय में भी चर्चा है कि वह अपने क्षेत्र के प्रत्याशी महेश त्रिवेदी का साथ नहीं दे रहे है।
बचने के लिए अब यही उपाय
इस बारे में बीनू शुक्ल का कहना है कि उनकी ड्यूटी संगठन घाटमपुर में लगा दी है। इसके बावजूद वह महेश की कई सभाओं में मौजूद रहे हैं। बीनू के भाई के कांग्रेस में जाने के बाद से उन पर आरोप लगने लगे थे। इसके अलावा कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार पूर्व विधायक भूधर नारायण का टिकट कटने से उनके भी नाराज होने की बात कही जा रही है। इस मामले में भूधर का कहना है कि जहां उन्हें बुलाया जाता है, चले जाते हैं। उनका तो घर ही कल्याणपुर में है। इसके अलावा किदवई नगर से पूर्व में सपा से प्रत्याशी घोषित होने के बाद मैदान से हटाए गए ओमप्रकाश मिश्र इस क्षेत्र के बजाए कन्नौज और देहात की विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार कर रहे हैं।
बसपा की हालत बुरी
यही हाल बहुजन समाज पार्टी का भी है। आर्यनगर विधानसभा सीट पर बसपा के प्रत्याशी रहे मनीष वाजपेयी का जब टिकट कटने से वह काफी नाराज हुए। आखिरकार अब उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसी तरह बसपा से सीसामऊ प्रत्याशी रहे रजनीश तिवारी भी टिकट कटने से नाराज थे। अब यह दोनों कांग्रेस-सपा पार्टी के प्रत्याशी को जिताने में लगे हैं।
आखिर तक चलेगा डैमेज कंट्रोल
आखिर तक चल रहा डैमेज कंट्रोल नाराज नेताओं को पार्टी में भितरघात से रोकने और उन्हें आश्वस्त करने के लिए सपा और भाजपा ने बकायदा टीम भी बना रखी है। कांग्रेस की तरफ से भी ऐसे नेताओं को बड़े पदाधिकारियों की तरफ से आश्वासन दिया गया। इसके बावजूद भितरघात जारी है। भाजपा के अलावा डैमेज कंट्रोल के लिए संघ ने भी रणनीति बनाई है।