पांच दिन पूर्व करोंड़ों की लागत से बन रहे निर्माणाधीन विद्युत उपखंड प्लांट के पास डकैतों द्वारा अपहृत मजदूर का कुछ भी पता नहीं चल सका है। उसे सकुशल बरामद कराने के लिए पुलिस अधीक्षक खुद जंगल में पहुंचे। दो टीमें बनाकर डकैतों की तलाश की गई इसके अलावा कार्यस्थल से गांव की ओर भागे बचे मजदूरों से बातचीत भी की।
खरौंध गांव के पास अरवारा पुरवा में करोंडा़ें की लागत से 220 केवीए का विद्युत प्लांट लग रहा है। जिसके लिए बाउंड्रीवाल व अन्य निर्माण कार्य चल रहा है। 29 नंबवर की रात को आधा दर्जन सशस्त्र बदमाशों ने निर्माण स्थल पर रह रहे मजदूरों के कैंप में धावा बोला। वहां मौजूद एक दर्जन मजदूरों को असलहों की नोंक पर कवर कर मोबाइल छीने और इलाहाबाद करछना भस्मा निवासी मजदूर मोहन लाल पटेल को अपने साथ ले गए। वहीं मौजूद जेसीबी आपरेटर रमेश व सहायक गुड्डू से बदमाश यह कहकर गए कि ठेकेदार से इस मजदूर के बदले छह लाख रुपये पहुंचा देना।
इसके बाद से निर्माण कार्य बंद है। आधे से ज्यादा मजदूर काम छोड़कर गांव लौट गए हैं और कुछ निर्माणस्थल से नजदीक एक गांव में डेरा जमाए हैं। इन मजदूरों ने बताया कि वह मोहन लाल को लेकर ही गांव जाएंगे। सभी इसी इंतजार में हैं कि वह जल्द सकुशल छूटकर आएगा। ठेकेदार फूलचंद्र उर्फ काका ने बताया कि अभी बदमाशों की दोबारा कोई मांग नहीं आई और न ही मजदूर लौटा है। भयभीत मजदूर काम करने को राजी नहीं है जिससे निर्माण बंद चल रहा है। इस अपहरण के पीछे डाकू गोप्पा गैंग के बचे सदस्यों का हाथ बताया जा रहा है।
सोमवार को पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह व अपर पुलिस अधीक्षक बलवंत चौधरी ने अलग-अलग टीम के साथ खरौंध, गढचपा, सरैंया, अरवारा, मानिकपुर व मप्र की सीमा से सटे गांव व जंगल में कांबिंग की। अपर एसपी ने बताया कि प्र्राथमिकता अपहृत मजदूर को सकुशल छुडाना है। अभीतक यह सही नहीं पता चल पा रहा है कि किस गैंग ने अपहरण किया है। ग्रामीणों व ठेकेदार से मिली जानकारी के अनुसार डाकू गोप्पा गैंग के बचे सदस्यों पर ही घटना को अंजाम देने का शक है। जल्द ही आरोपियों को पकड़कर अपहृत को छुडाया जाएगा।