डकैतों की मौत का मौसम शुरू हो गया। उम्मीद जागी है कि कई बार पुलिस के हाथों से फिसल गए बबुली कोल समेत पाठा में आतंक का पर्याय बने दस्यु गोप्पा, गौरी यादव और ललित पटेल जैसे सरगना बारिश के मौसम जुलाई या अगस्त में ढेर हो सकते हैं। पिछले एक दशक में पाठा क्षेत्र के एक दर्जन से ज्यादा दुर्दांत दस्यु इन्हीं महीनों में मारे गए हैं। बारिश से पाठा का जंगल और पहाड़़ हरे-भरे हो जाते हैं। जगह-जगह जल भराव और नदी-नालों में बाढ़ पुलिस के लिए मुफीद और डकैतों के लिए बवालेजान बन जाती है।
पाठा का दस्यु इतिहास खंगाले तो पाएंगे कि 70 के दशक के बाद से तीन दशक तक यहां दस्यु ददुआ की बादशाहत कायम रही।
अनेकों बार पुलिस के हाथों से वह बच निकला। लेकिन बारिश के मौसम में 22 जुलाई 2007 को एसटीएफ टीम ने उसे10 साथियों समेत चित्रकूट के झलमल (मानिकपुर) जंगल में मार गिराया। ददुआ पर पांच लाख रुपये का इनाम था। बारिश में ददुआ जैसे दस्यु के मारे जाने का सिलसिला आगे भी चला।
विज्ञापन
2 of 5
डेमो पिक
‘खाकी किलर’ के नाम से कुख्यात रहे पांच लाख के इनामी दस्यु सरगना अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया की मौत का परवाना भी इसी मौसम में कटा। 4 अगस्त 2008 को पुलिस ने चित्रकूट जनपद के सिलखोरी गांव में ढेर कर दिया। बरसात में ही दस्यु सरगना सुंदर पटेल उर्फ रागिया को मध्य प्रदेश पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। यह माह भी जुलाई 2012 था। अगस्त 2015 में स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया को पुलिस ने ढेर कर दिया। इन चार डकैतों के अलावा भी ज्यादातर डकैत जुलाई-अगस्त के महीनों में ही मारे गए।
विज्ञापन
3 of 5
डेमो पिक
डीआईजी को भी उम्मीद कि बारिश होगी मुफीद
चित्रकूटधाम मंडल के पुलिस उप महानिरीक्षक ज्ञानेश्वर तिवारी भी बरसात में डकैतों को ठिकाने लगाने की उम्मीदों से भरपूर हैं। उन्होंने बताया कि बबुली, गोप्पा, गौरी यादव और ललित पटेल आदि के लिए पाठा के जंगलों में लगातार कांबिंग चल रही है। बरसात शुरू हो जाने पर अब पुलिस ने कुछ खास रणनीति तैयार कर डकैतों के विरुद्ध आपरेशन शुरू कर दिया है। इसमें मध्य प्रदेश पुलिस का भी सहयोग लिया जा रहा है। डीआईजी ने उम्मीद जताई कि ददुआ, ठोकिया, रागिया, बलखड़िया की तर्ज पर बबुली समेत मौजूदा डकैत भी इसी बारिश में मारे जा सकते हैं।
4 of 5
डेमो पिक
बरसात में ही डकैतों ने किए हैं कई नरसंहार
जहां एक तरफ जुलाई-अगस्त दस्यु सरगनाओं की मौत का पैगाम लेकर आते हैं तो दूसरी तरफ डकैतों ने अपनी कई दुस्साहपूर्ण और चर्चित बड़ी वारदातें भी इन्हीं महीनों में अंजाम दी हैं। 17 जुलाई 2003 को सुबह दस्यु सरगना ठोकिया ने भरतकूप के बगहियापुरवा (चित्रकूट) में धावा बोलकर महिला, दो बच्चों सहित आधा दर्जन को मौत के घाट उतार दिया और घरों में आग लगा दी थी। इससे बड़ी घटना 23 जुलाई 2007 की रात को बघोलन जंगल (बांदा) में ठोकिया गिरोह ने अंजाम देते हुए आधा दर्जन एसटीएफ जवानों को गोलियों से भून दिया था। पांच अन्य जवान घायल हो गए थे। डकैत बलखड़िया और बबुली कोल ने भी 7 अगस्त 2011 को डोडामाफी (चित्रकूट) में पांच लोगों की सामूहिक हत्या कर दी थी। इनमें सास-बहू, नातिन भी शामिल थीं।
जुलाई-अगस्त में मारे गए डकैत
शिवकुमार उर्फ ददुआ 23 जुलाई 2007
अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया 04 अगस्त 2008
सुंदर पटेल उर्फ रागिया 15 जुलाई 2012
स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया 02 जुलाई 2015
राजकरन पटेल उर्फ चच्चू 16 अगस्त 2006
नंगू सिंह उर्फ इंद्रजीत सिंह 08 अगस्त 2006