दस्यु सुंदरी सीमा यादव (फाइल फोटो)
कभी डाकुओं की हुंकार से कांपने वाले बीहड़ पट्टी में हालात धीरे धीरे सुधर चुके हैं। बंदूक थामने वालों ने सियासत की राह पकड़ ली है। इन्हीं में एक नाम दस्यु सुंदरी सीमा यादव का जुड़ गया है। वह सिकंदरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, मंगलवार को जब उन्होंने नामांकन फार्म खरीदा तो यह एलान भी कर दिया कि राजनीति के जरिये वह महिलाओं के अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लडे़ंगी।
फूलन देवी के बाद राजनीति की राह पकड़ने वाली सीमा यादव दूसरी दस्यु सुंदरी हैं। उनकी कहानी भी फूलन से मिलती जुलती है। सिकंदरा के ही महमूद गांव की रहने वाली सीमा यादव जब 11 साल की थीं, खूंखार डाकू गंभीर सिंह यादव ने उनका घर से अपहरण कर लिया था। बकौल सीमा, इसके बाद उस पर खूब अत्याचार किए गए। आखिर उसे जुल्म की दुनिया अपनानी पड़ी और बंदूक थाम वह भी बीहड़ की रानी बन गई।
कुछ वर्ष बाद दस्यु चंदन यादव के गैंग में शामिल हो गई। इसके बाद उप्र और मध्य प्रदेश की पुलिस उनकी तलाश में लग गई थी। 2005 में पुलिस एनकाउंटर में चंदन की मौत हो गई। तब सीमा यादव ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उस पर सीमा यादव पर 36 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे। 2014 में उसे सभी मुकदमों से बरी करते हुए रिहा कर दिया गया।
सीमा का कहना है: महिलाओं के साथ अत्याचार किया जा रहा है। राजनीति में आकर इसके खिलाफ लड़ना है। महिलाओं की तरक्की के लिए काम करूंगी।