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इनामी डकैत गंगा गिरफ्तार, बीहड़ के गांवों में वसूलता था रंगदारी

Sat, 15 Jul 2017 12:26 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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यूपी में जालौन के बीहड़ के गांवों में आतंक फैलाने वाले 15 हजार के इनामी डकैत गंगा प्रसाद को बुधवार रात दिबियापुर में कानपुर एसटीएफ ने दबोच लिया। वह पिछले साल झांसी कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस हिरासत से भाग गया था। गंगा पर हत्या, अपहरण, बलात्कार सहित दर्जनों मामले दर्ज हैं।
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रामपुरा थाना क्षेत्र के नीनावली गांव निवासी इनामी डकैत गंगाप्रसाद पुत्र माखन दोहरे वर्ष 2016 में झांसी कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस हिरासत से भाग निकला था। गुरुवार शाम एसटीएफ को सूचना मिली कि गंगा प्रसाद किसी को लेने बाइक से दिबियापुर आ रहा है। इस पर एसटीएफ कानपुर के निरीक्षक सुशील कुमार सिंह ने एसआई रजत कुमार सिंह, एसआई राकेश कुमार सिंह, रामदयाल पांडेय, देवेश द्विवेदी, कमांडो संजीव कुमार, शिव कुमार के साथ परमहंस बगिया भगवतीगंज के पास घेराबंदी कर ली। कुछ देर में गंगा प्रसाद बगिया में आकर रुका।

एसटीएफ टीम ने दबोचने की कोशिश की तो उसने तमंचे से फायर झाेंक दिया। इसके बावजूद एसटीएफ टीम ने गंगा प्रसाद को दबोच लिया। उसके पास से तमंचा, दो कारतूस और एक बाइक बरामद की गई। बदमाश के पास बाइक के कागजात भी नहीं थे। दिबियापुर थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा ने बताया कि  बदमाश गंगाप्रसाद पर आईजी कानपुर ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। उस पर अपहरण एवं हत्या जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।
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  बीहड़ के गांवों में वसूलता था रंगदारी
बदमाश गंगा प्रसाद पर हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार और अपहरण के कई मामले दर्ज हैं। रामपुरा क्षेत्र के सुल्तानपुरा, हुक्मपुरा, बिलौर, किशनपुरा, राटौरनपुरा, हनुमंतपुरा और मड़इयन आदि गांवों में उसकी दहशत थी। डकैत पहलवान सिंह गूर्जर और जगजीवन सिंह परिहार गिरोह का सदस्य रहे गंगा ने पुलिस हिरासत से भागने के बाद मुनेश यादव के साथ नया गैंग बना लिया था। ये गैंग बीहड़ के गांव में रंगदारी वसूल रहा था। दहशत का आलम ये था कि कोई भी प्रधान या ग्रामीण पुलिस से शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। तीन चार माह पूर्व निनावली और सिद्वपुरा गांव के प्रधानों से रंगदारी मांगी थी। रुपये न देने पर प्रधानों ने गांव छोड़ दिया। सूत्रों के अनुसार कुछ माग पूर्व गंगा ने गांव की एक महिला को अगवा कर एक रात अपने पास रखा था। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को एसटीएफ ने जब उसे दबोचा तो साथ में प्रेमिका लवली भी थी।

अपने मालिक की कर दी थी हत्या
गंगा प्रसाद वर्ष 2013 में सुलतानपुर गांव के किसान सुखबीर का ट्रैक्टर चलाता था। किसी बात पर उसकी सुखबीर से अनबन हो गई। इस पर उसने सुखबीर की हत्या कर दी। 2014 में रामपुरा पुलिस ने उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज किया। 2015 में गंगा प्रसाद ने झांसी के समदर गांव से कबाड़ व्यापारी मुस्तफा का अपहरण कर परिजनों से 40 लाख की फिरौती वसूली थी।
  मौरंग के ट्रकों से भी करता था वसूली 
संगीन अपराधों के अलावा गंगा ने हाल ही में मध्यप्रदेश की ओर से आने वाले मौरंग के ट्रकों से भी वसूली का धंधा शुरू किया था। अपने गैंग के साथ वह सुलतानपुरा और द्वार घाट पर खड़ा रहता था और निकलने वाले मौरंग के हर ट्रक से 2000 रुपये की वसूली करता था।

 
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पुलिस की गिरफ्त में झांसी से फरार चल रहा गंगाप्रसाद। - फोटो : अमर उजाला
गंगाप्रसाद ने कहा, अपहरण के मामले में झांसी जेल में बंद था
एसटीएफ की हिरासत में गंगाप्रसाद ने बताया कि इटावा के पूर्व एसओजी प्रभारी ने उसे झांसी पेशी के दौरान भागने में मदद की थी। उसके साथ अपहरण कांड का एक और आरोपी भागा था। गंगाप्रसाद ने बताया कि वर्ष 2014 में साकिन लोहारी समथर निवासी तत्कालीन एसओजी प्रभारी इटावा रहीम खां ने गांव के रिश्ते के बहनोई मुस्तफा का अपहरण उससे कराया था। इसमें 51 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। बाद में रहीम ने ही मुस्तफा एवं उसके बीच में पड़कर 35 लाख रुपये फिरौती में मामला निपटाया था। घर पहुंचने पर मुस्तफा को सारी बात पता चली। उसे यह भी पता चला कि रहीम हनुमंतपुरा बिठौली के बीहड़ में मात्र 10 लाख रुपये लेकर पहुंचा था। इसके बाद से मुस्तफा रहीम से बाकी 25 लाख रुपये मांगने लगा। बाद में पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए रहीम और गंगाप्रसाद को गिरफ्तार कर लिया।  गंगाप्रसाद ने बताया कि इसी मामले में रहीम, उसका साथी और वह झांसी जेल में बंद थे। जेल में भी मुस्तफा का परिवार रहीम से रुपये लौटने के लिए दबाव डाल रहा था। बकौल गंगाप्रसाद, मुस्तफा और उसके परिवार को धमकाने के लिए ही रहीम ने उसे और उसके साथी को भागने की तरकीब बताई थी। गंगा प्रसाद का कहना है कि इसके लिए रहीम ने लाखों रुपये खर्च किए थे।  बताया कि बाद में रहीम को सजा हो गई और वह झांसी जेल में ही बंद है।

जगजीवन गैंग से दोस्ताना और सलीम से रहा छत्तीस का आंकड़ा
गंगाप्रसाद ने बताया कि वर्ष 1996 में उसकी सलीम गुर्जर गैंग ने पकड़ कर ली थी। डेढ़ माह तक वह सलीम गैंग की पकड़ में रहा। बाद में पुलिस मुठभेड़ में सलीम के कई साथी मारे गए और वह भाग निकला। इसके बाद से सलीम उसका दुश्मन बन गया था। इसी दौरान डाकू जगजीवन गैंग से उसका दोस्ताना हो गया। सलीम का दिल्ली तक उसने पीछा नहीं छोड़ा। इसी के चलते आज भी उसका सिक्का अपने क्षेत्र में चलता है। उसकी जुबान पर सभी काम हो जाते हैं।

-मुखबिर की सूचना पर कानपुर एसटीएफ ने दबोचा
-पिछले साल झांसी कोर्ट में पेशी के दौरान भागा था


 
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