चित्रकूट के वन क्षेत्र में खनिज संपदा अधिक होने से खनिज माफिया के साथ-साथ कुख्यात डाकुओंं की नजर भी इस क्षेत्र पर गड़ी है। इस काम को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी डकैतों का बहाना बनाकर सहभागी बन जाते हैं। हाल ही में वन कर्मियों पर डाकुओं ने फायरिंग की लेकिन तीन दिन बाद भी किसी ने डकैतों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। जिससे ऐसे आरोपों को बल मिलता है। खनिज संपदा पर डाकुओं की हिस्सेदारी के मामले अब सामने आने लगे हैं। पुलिस अधिकारियों का भी मानना है कि पुलिस कई बार वन क्षेत्र में अवैध खनन करने वालों को पकड़ती है लेकिन वन विभाग के अधिकारी उस पर कड़ी कार्रवाई नहीं करते। जिससे आरोपी छूटकर फिर उसी काम में लग जाता है।
गौरतलब है कि मानिकपुर विकास खंड के पाठा क्षेत्र में पत्थर, चूने की खदान भरतकूप और जिले की सीमावर्ती में बदौसा नदी से बालू के साथ ही मौरंग अच्छी खासी मात्रा में पाई जाती है। जिससे अवैध खनन जारी रहता है। इधर इस कार्य में अच्छी कमाई देखकर डाकुओं की भी नजर लग गई। पाठा क्षेत्र में डाकू बबुली और भरतकूप क्षेत्र में पत्थर तोड़ान व क्रेशर उद्योग से ललित पटेल गैंग वसूली कर रहा है। कुछ स्थानों पर तो खुद गैंग अवैध खनन का कार्य शुरू करना शुरु कर दिया। इसी माह के 15 जून की रात को बहिलपुरवा क्षेत्र के करौंहा जंगल मेें डाकू बबुली गैंग के खिलाफ अवैध खनन कार्य कराने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मौके पर मौरंग से लदे ट्रैक्टर और आधा दर्जन लोग भी पकडे़ गये थे। मंगलवार को रानीपुर वन्य विहार के रेंजर त्रिवेणी प्रसाद मंगलवार को वाहन के साथ कर्मचारियों के साथ गये अवैध खनन को रोकने के लिए गये थे। जिस पर उनके वाहन पर डाकूओं ने गोली चलाई थी। इससे वन क्षेत्र में अधिकारियों जाने से कतरा रहे हैं।
डकैतों व वनकर्मियों की शह का आरोप
मानिकपुर कस्बे के एक समाजसेवी ने अभी हाल में अधिकारियों को पत्र सौंपकर आरोप लगाया था कि डकैतों की शह पर पाठा क्षेत्र के इटवा गांव में रानीपुर वन्य विहार की जमीन पर मौरंग का अवैध खनन किया जा रहा है। जिसमें सीमा से लगे मध्य प्रदेश की चित्रकूट सतना रोड पर मौरंग डाली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस कार्य में वन विभाग व रानीपुर वन्य विहार के अधिकारी भी मिले हुए हैं। अवैध खनन से होने वाली कमाई में सबका बराबर बंटवारा हो रहा है।
पुलिस भरसक करती प्रयास पर नहीं दर्ज कराते रिपोर्ट
पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह ने बताया कि जहां भी अवैध खनन की जानकारी मिलती है वहां तत्काल पुलिस भेज कर रोक लगाई जाती है। इस काम में जंगली क्षेत्र में कुछ स्थिति अलग है। हाल ही में एक चूने के पहाड़ से खनन में डकैतों की हिस्सेदारी की बात सामने आ गई। यह क्षेत्र वन विभाग का है। विभागीय अधिकारियों को बताया गया लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। यही हाल अभी निही के कोडरिया जंगल वाले मामले में हुआ। पुलिस तो भरसक प्रयास करती है लेकिन वन विभाग ही सहयोग नहीं करता। जिससे क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने में कुछ अड़चन है।
वन विभाग की शह नहीं
वन विभाग के डीएफओ ललित गिरी ने बताया कि अवैध खनन में वनकर्मियों की भूमिका संदिग्ध या डाकुओं से मिलकर कमीशन लेने के आरोप गलत हैं। कुछ स्थानों पर अवैध खनन की शिकायत मिली तो उस पर कार्रवाई की गई है। भरतकूप के पहरा गांव में मौरंग खुदाई पर वन विभाग की टीम गई थी तो वहां कुछ लोगों ने हमला कर दिया था जिसमें चालक की मौत हो गई थी।