हाईटेक युग में बीहड़ों का स्वरूप भले ही न बदला हो लेकिन बीहड़ों में रहने वाले खूंखार डकैतों का काम करने का तरीका बिल्कुल बदल चुका है। ये अब पहले से भी ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। नये जमाने की टेक्नलॉजी के साथ हाईटेक हथियार रखने वाला यूपी का सबसे बड़ा ‘गब्बर’ इस समय पुलिस के लिए ‘बिग चैलेन्ज’ बन चुका है।
STF के एनकाउंटर से हर बार बच निकलने वाला ये डकैत इतना शातिर है कि इसके नाम से ही पूरा बुंदेलखंड थर्राता है। कहते हैं इसकी बीहड़ों में खूब चलती है। बीहड़ों में एक डकैत मरता है तो दूसरा उसका स्थान ले लेता है. कभी ददुआ, तो कभी ठोकिया,लखड़िया और अब बबुली कोल।
इन डाकुओं के गैंग पुलिस के लिए सिर दर्द बने हुए हैं। पुलिस की हाईटेक हथियार लूटकर गांववालों को दहशत में रखने वाले इस इनामी डकैत बबुली को पकड़ना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
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बबुली गैंग की तलाश कर रही पुलिस
जानें, कौन है बबुली कोल
बबुली कोल की उम्र इस समय करीब 38 साल होगी। बबुली कोल पर इस समय साढ़े पांच लाख का इनाम है। चित्रकूट जिले के डोडा सोसाइटी क्षेत्र के के गांव कोलान टिकरिया के मजदूर रामचरन के घर में 1979 में हुआ था। बबुली गांव के ही प्राथमिक स्कूल से क्लास आठ तक की पढ़ाई की। फिर 12वीं की पढ़ाई के लिए वह बांदा चला गया। लेकिन 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आर्थिक स्थित ठीक न होने के चलते गांव आ गया और किसानी करने लगा।
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बबुली गैंग की तलाश कर रही पुलिस
जेल जाने की वजह से बना डकैत
साल 2007 में पुलिस ने उसे ठोकिया की मदद के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और तमंचा दिखाकर जेल भेज दिया। छह माह जेल के अंदर रहने के दौरान ठोकिया के साथी लाले पटेल से इसकी मुलाकात हो गई। जेल से छूटने के बाद बबली ने लाले को छुड़ाने के लिए जाल बिछाया। जब पेशी नें लाले आया तो उसे वहां से बबली कोल फरार करा ले गया और दोनों पाठा के जंगल में कूद गए। पिछले कुछ महीनों से पुलिस इलाके की काम्बिंग कर रही थी। पुलिस का मानना है कि बारिश के दौरान डकैत जंगल से गांव की तरफ आते हैं। बारिश के बाद घने होते जंगल इनके छिपने का मुफीद इलाका होता है। तब इन्हें तलाशना बहुत मुश्किल हो जाता है।
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बबुली गैंग की तलाश कर रही पुलिस
सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह हुए थे शहीद
बबुली कोल गैंग की 20 दिन पहले पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। इस एनकाउंटर में एक डाकू पकड़ा गया तो दूसरी ओर सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह शहीद हो गए। इससे पहले भी कई बार बाबली कोल की पुलिस से मुठभेड़ हो चुकी है, लेकिन वह हमेशा पुलिस की पकड़ से दूर ही रहा है।
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बबुली गैंग की तलाश कर रही पुलिस
कभी ददुआ का चेला था फिर बलखड़िया गैंग में शामिल हुआ
यूपी के बुंदलेखंड में इस समय दहशत का सबसे बड़ा नाम बबुली कोल है। उसके नाम से बकायदा लेटरपैड से रंगदारी वसूली जाती है। पुलिस को बबुली कोल के कई लेटरपैड भी बरामद हुए हैं। डकैत बबुली कभी डकैत ददुआ का चेला हुआ करता था। ददुआ की मौत के बाद वो दस्यु सरगना बलखड़िया उर्फ बाल खड़े उर्फ सुदेश पटेल के गिरोह में शामिल हुआ। एक मुठभेड़ में बलखड़िया के मरने के बाद बबली कोल गैंग का सरदार बन गया।
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बबुली गैंग की तलाश कर रही पुलिस
लेटर पैड के जरिए वसूली
बबुली कोल पर मारपीट, हत्या, रंगदारी, अपहरण जैसे संगीन मामले दर्ज हैं। बीहड़ों में इन दिनों बबुली कोल का राज चलता है और कहा जाता है कि बुंदेलखंड के गांवों में उसकी इजाजत के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। बुंदेलखण्ड की जमीं पर डकैतों का राज कई दशकों से रहा है. एक डकैत मरता है तो दूसरा पैदा हो जाता है. कहते हैं कि पाठा के जंगलों में रहने वाला बबुली अपने लेटर पैड से वसूली करता है. बबुली के गैंग के डकैत बुंदेलखंड के गांव-गांव जाकर बबुली का लेटर पैड व्यापारियों को बांटते हैं।
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बबुली गैंग की तलाश कर रही पुलिस
गैंग का शार्पशूटर ऐसे बना सरदार
बलखड़िया के मारे जाने के बाद करीब 15 डकैतों के समूह का वह सरदार बन गया। बलखड़िया गैंग में वह शार्प शूटर था। उसके आतंक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुखबिरी की सूचना पर उसने डोडा गांव के किसान को गोलियों से छलनी कर दिया था। इलाके में उसके आतंक को देखते हुए सरकार ने जल्द से जल्द पकड़ने के लिए उस पर एक साल के अंदर सात लाख तक का इनाम रख दिया।
गांववालों पर ढाता है जुल्म
गांववालों में दहशत फैलाने के लिए वह लगातार उन पर जुल्म ढाता रहता है। यही वजह है कि इतना इनाम होने के बाद भी कोई उसके खिलाफ नहीं जाता। 30 जून को किडनैप किए गए तीन आदमी ( एमपी के नयागांव थाना निवासी मुन्ना यादव, रामप्रसाद और पथरापाल देव के इंद्रपाल यादव ) को जिंदा जलाकर हड़कंप मचा दिया था। गांव के लोगों में इस हद तक दहशत है कि उन्होंने अपने मोबाइल तक तोड़ दिए हैं, ताकि उन पर जासूसी का आरोप न लग सके और पुलिस सर्विलांस के जरिए उन्हें परेशान न करे।