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Kanpur News: फिनिश्ड लेदर पर सीमा शुल्क नहीं हुआ खत्म, शू अपर में मिली रियायत

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कानपुर। आम बजट में कानपुर के चमड़ा कारोबारियों को खास उम्मीदें थीं, खासकर फिनिश्ड लेदर पर लगने वाले सीमा शुल्क को समाप्त करने की। इसके अलावा, कच्चे चमड़े की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निर्यातकों ने 100 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने और भाव तय करने की मांग की थी लेकिन सरकार ने इन मांगों पर कोई राहत नहीं दी जिससे कारोबारियों में निराशा है। पिछले साल घोषित 20 हजार करोड़ के पैकेज पर भी कोई नई घोषणा नहीं हुई।
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हालांकि, बजट में इंपोर्टस आफ गुड्स एैट कंसेसनल रेट (आईजीसीआर) योजना का विस्तार शू अपर निर्यातकों तक किया गया है। यह विस्तार कस्टम्स अधिसूचना संख्या 1 फरवरी 2026 के अंतर्गत इनपुट्स पर मूल सीमा शुल्क में छूट प्रदान करेगा। यह योजना पहले से ही लेदर गारमेंट्स, फुटवियर तथा अन्य लेदर उत्पादों के निर्यातकों के लिए लागू थी जिससे मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त आईजीसीआर योजना के तहत निर्यात की समय-सीमा को आयात की तिथि से छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया है जिससे निर्यातकों को अधिक सुविधा और लचीलापन मिलेगा। आईजीसीआर योजना की वैधता को 31 मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है, और बोना फाइड निर्यातकों द्वारा आयात किए जाने वाले टैग्स, लेबल्स, स्टिकर्स, बेल्ट आदि पर मूल सीमा शुल्क में छूट को भी 31 मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। यह कदम चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेगा।
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बातचीत
चमड़ा उद्योग के लिए बजट लाॅलीपाॅप
चमड़ा उद्योग के लिए बजट लॉलीपॉप जैसा है। अमेरिका का टैरिफ संकट किसी से छिपा नहीं है। कच्चे चमड़ा की उपलब्धता न होने से उच्च मूल्य पर इसे कारोबारियों को खरीदना पड़ता है। स्लाटर हाउस 100 से 200 रुपये में कच्चा चमड़ा निर्यात कर रहे हैं जबकि स्थानीय स्तर पर एक हजार से 1200 में नहीं मिल पा रहा है। इस पर 100 प्रतिशत शुल्क की घोषणा बजट में की जानी चाहिए थी। - असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद।
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चमड़ा उद्योग को थी ज्यादा उम्मीद
आईजीसीआर योजना का विस्तार शू अपर निर्यातकों तक किया गया। इसके निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। इसी तरह निर्यात की समय-सीमा को आयात की तिथि से छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया है। इससे उत्पाद प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। हालांकि चमड़ा उद्योग को सरकार से अमेरिकी टैरिफ को देखते हुए ज्यादा उम्मीदें थीं। - जावेद इकबाल, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद।
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फिनिश्ड लेदर पर सीमा शुल्क होना था खत्म
आयात होने वाले फिनिश्ड लेदर पर 11 प्रतिशत सीमा शुल्क को समाप्त किया जाना चाहिए था। ताकि इससे तैयार होने वाले उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर बेच सकें। इसके साथ ही, 3,000 रुपये तक के फुटवियर पर कर घटाया जाना चाहिए था। सरकार ने चमड़ा उद्योग को बड़ी राहत नहीं दी है। - यादवेंद्र सचान, उद्यमी, चमड़ा उत्पाद।
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पैकेज का कारोबारी कर रहे थे इंतजार

सरकार ने बजट में लेदर कारोबारियों को बहुत अधिक राहत तो नहीं दी। पिछले साल बजट में जिस 20 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा हुई थी, उसे लेकर कोई वक्तव्य सामने नहीं आया। हम उसी पैकेज का इंतजार कर रहे हैं। पैकेज मिलने से लेदर इंडस्ट्री से जुड़े हर वर्ग के कारोबारी को बहुत अधिक लाभ होगा। कुछ रियायतें दी गईं, जिनका लाभ कारोबारी ले सकेंगे। - मुख्तारुल अमीन, अध्यक्ष, सुपर हाउस ग्रुप।
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