कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने जर्मनी की रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी नॉलेज फाउंडेशन के साथ समझौता किया है। यह समझौता छात्रों को भारत और जर्मनी दोनों जगह पढ़ाई का अवसर देगा। यह पहली बार है जब सीएसजेएमयू ने ऐसा अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम एक्सचेंज शुरू किया है।
कुलपति विनय कुमार पाठक और फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डैनियल गीगिस ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। नई योजना में पांच साल का इंटीग्रेटेड बैचलर और मास्टर्स कार्यक्रम शामिल है। इसे 3+1+1 मॉडल पर तैयार किया गया है। छात्र पहले तीन साल सीएसजेएमयू के यूआईईटी में बीटेक की पढ़ाई करेंगे। इसके बाद दो साल जर्मनी में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करेंगे। पढ़ाई के दौरान छात्रों को जर्मन भाषा भी सिखाई जाएगी।
इस कोर्स में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और डिजिटल बिजनेस मैनेजमेंट जैसे दो प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों को भारत और जर्मनी दोनों जगह की डिग्री मिलेगी। जर्मन प्रोफेसर ऑनलाइन और हाइब्रिड माध्यम से भी पढ़ाएंगे। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिल सकेगी।
पढ़ाई संग कमाई का अवसर
कार्यक्रम की सबसे खास बात पढ़ाई के दौरान कमाई का अवसर है। जर्मनी में पढ़ाई के समय छात्र हर महीने एक से 2.5 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। उन्हें पोर्श, आईबीएम और एचपी जैसी बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप और नौकरी के अवसर मिलेंगे। मास्टर्स पूरा करने के बाद छात्रों को 18 महीने का वर्क परमिट मिलेगा। इसके बाद वे आसानी से जर्मनी में स्थायी निवास भी हासिल कर सकते हैं। शुरुआती सालाना वेतन 50 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यह कार्यक्रम 2026 सत्र से लागू किया जाएगा और इसमें सीमित सीटें रखी गई हैं।