बहुजन समाज पार्टी में बंटवारे की खिचड़ी पक रही है। ये खिचड़ी कोई और नहीं बल्कि पार्टी के नेता ही पका रहे हैं। इस पूरी कवायद के पीछे मंशा एक नए संगठन को खड़ा करने की है ताकि 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले किसी बड़ी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जा सके।
इस खिचड़ी को पकाने में कानपुर, कन्नौज, बांदा, लखनऊ से लेकर प्रदेश के बाहर तक के दिग्गज लगे हैं। बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद कुछ समय पहले पार्टी से निकाले जा चुके हैं। उनके साथ कई और नेता है, जिनका भी यही हश्र हुआ है।
इन नेताओं का मानना है कि जिस कैडर को लेकर बसपा ऊपर उठी थी, वही इस पार्टी से खत्म हो गया है। दद्दू प्रसाद को बसपा से जुड़े जो लोग अब भी अपना नेता मानते हैं उनमें पूर्व जोनल कोआर्डिनेटर सर्वेश अंबेडकर, वर्तमान में बसपा से एमएलसी विनय शाक्य, वृजेश कुमार प्रजापति, शिवभूषण पटेल, रामरूप बाबू के अलावा यूपी के बाहर के कई प्रमुख नेता शामिल हैं। इनमें सरोज कुमार उड़ीसा, सेवकराम और आईएस मोर एमपी से, सुरेश माने महाराष्ट्र सहित कई बड़े नाम हैं।
बसपा के एक दर्जन प्रमुख नेता हमारे साथ हैं। यह सभी पार्टी की कैडर वाली विचारधारा को मानते हैं। हमने कांशीराम के साथ रहकर जो सीखा वह पार्टी से गायब हो चुका है। ऐसे में उस विचारधारा को जीवित रखने को हम कुछ बसपाइयों को जोड़कर एक नया संगठन बनाने में जुटे हैं।
- दद्दू प्रसाद पूर्व कैबिनेट मंत्री
मैं इस समय बसपा का एमएलसी हूं, पार्टी में वर्तमान में जो राजनीति चल रही है, वह ठीक नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव से काफी गड़बड़ हो रहा है। दद्दू प्रसाद से अभी हमने संपर्क नहीं किया है, लेकिन वे हमारे अच्छे नेता हैं, जिन्होंने पार्र्टी को नई दिशा दी है, वह जो कर रहे हैं, अच्छा कर रहे हैं।
- विनय शाक्य पूर्व जोनल कोआर्डिनेटर बसपा