चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में शिक्षकों की सीधी भर्ती और प्रमोशन प्रक्रिया में धांधली के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। टीम को मंगलवार को साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं। मोबाइल फोन पर भर्ती का ठेका लेने वाली ‘मैडम’ की सीडी भी दी गई है, जिसका कनेक्शन कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह के आवास से है।
इस सीडी में ‘मैडम’ और डॉ. प्रभाकांत मिश्रा के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा है। डॉ. प्रभाकांत मिश्रा ही मामले के मुख्य शिकायतकर्ता हैं। उन्हीं के मोबाइल फोन पर कुलपति आवास के बेसिक टेलीफोन नंबर से फोन आया था। इसकी कॉल डिटेल भी जांच टीम को उपलब्ध कराई गई है।
शिक्षकों की सीधी भर्ती और प्रमोशन प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच के लिए राज्यपाल राम नाईक ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसके अध्यक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसके त्रिपाठी हैं। फैजाबाद और बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति टीम के सदस्य हैं। इस टीम ने कानपुर नगर के सर्किट हाउस में डेरा जमाया है।
यह टीम 29 मार्च तक रहेगी और लिखित में शिकायत और दस्तावेज लेकर जांच-पड़ताल करेगी। मंगलवार को इस टीम ने कृषि विश्वविद्यालय के सीनियर टीचर डॉ. यूडी अवस्थी, डॉ. एके दुबे, डॉ. आरबी सिंह और स्वास्थ्य केंद्र में तैनात रहे डॉ. एसके सिंह से अलग-अलग बातचीत की। साथ ही संबंधित दस्तावेज भी लिए।
जांच टीम को बताया गया कि विज्ञापन निकालने और क्वालिफिकेशन के मानक को दरकिनार करके इंटरव्यू कराया गया है। जो शिक्षक इंटरव्यू में नहीं जा सकते थे, उन्हें भी बुलाया गया है। स्क्रीनिंग की कोई व्यवस्था नहीं रखी गई। यही वजह है कि तमाम लोगों को इंटरव्यू में बुलाकर वापस किया गया।
इससे पहले मुख्य शिकायतकर्ता डॉ. प्रभाकांत मिश्रा से जांच टीम ने करीब तीन घंटे तक बातचीत की। सर्किट हाउस में उनसे भर्ती का ठेका लेने वाली ‘मैडम’ और उससे संबंधित मामलों की जानकारी ली। एक शिक्षक ने जांच पूरी होने तक कुलपति को सस्पेंड करने की मांग रखी। इस पर जांच टीम ने असहमति जताई।
टीम ने कहा कि यह अधिकार राज्यपाल के पास है। डॉ. एसके सिंह ने भी लिखित बयान देने के साथ ही दस्तावेजी साक्ष्य भी सौंपे। एसआरएफ अजय यादव ने भी बयान दर्ज कराए। जांच टीम को एक सीडी भी सौंपी। इस मामले में कुछ और लोगों ने बयान दर्ज कराने की बात कही है। उन्हें बुधवार शाम 5 बजे बुलाया गया है।