कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अब टिश्यू कल्चर लैब की स्थापना की जाएगी। ढाई करोड़ के बजट से तैयार होने वाली लैब में छात्र-वैज्ञानिक ऐसे बीजों को तैयार करेंगे जो जलवायु के प्रति सहनशील हों और विपरीत परिस्थितियों में बेहतर पैदावार दे सकें। शुरुआत इस लैब में आलू और केला की ऐसी प्रजातियां विकसित की जाएंगी जो जलवायु परिवर्तन को सहने में सक्षम हों।
प्रदेश सरकार ने इसी वर्ष के बजट में इस लैब की घोषणा की थी। विवि के शोध एवं अनुसंधान प्रभारी डॉ. पीके सिंह ने बताया कि लैब स्थापना के लिए कार्यदायी संस्था का चयन हो चुका है। मुख्य परिसर में ही इसका विकास कराया जाएगा। लैब बनने के बाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों को टिश्यू कल्चर से संबंधित प्रयोग और अनुसंधान करने का अवसर मिलेगा। विवि के फार्म पर प्रयोग के बाद किसानों को बीज और पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि जलवायु सहनशील खेती को बढ़ावा मिल सके। कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने बताया कि लैब की मदद से आलू और केला की जलवायु सहनशील प्रजातियों को तैयार करना संभव होगा। यह पहल न केवल किसानों को लाभ पहुंचाएगी बल्कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और छात्रों के कौशल विकास की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।
क्या है टिश्यू कल्चर तकनीक
टिश्यू कल्चर एक वैज्ञानिक विधि है जिसमें पौधों के ऊतक (टिश्यू) को नियंत्रित वातावरण में विशेष पोषक माध्यम पर विकसित किया जाता है। इस प्रक्रिया से रोगमुक्त, उच्च गुणवत्ता वाले और एक जैसे पौधे तैयार किए जाते हैं। इस तकनीक से कम समय में बड़ी संख्या में पौधे तैयार करना संभव होता है। ऐसी प्रजातियों का भी विकास किया जा सकता है जो रोगों, कीटों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों का सामना कर सकें।