फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur News: बढ़े कच्चे तेल के दाम, 15-20 प्रतिशत बढ़ सकता मालभाड़ा

विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर। अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध बढ़ता जा रहा है। इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है। कच्चे तेल के दाम 8.3 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे 15-20 प्रतिशत तक मालभाड़ा बढ़ सकता है। युद्ध लंबा खिंचा तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। कारोबारी परेशान हैं।
विज्ञापन

गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों में आपूर्ति लडखड़ाने का डर भी हो गया है। दुबई में एयरपोर्ट बंद होने से यूरोप के बाजारों पर भी असर पड़ गया है। वहीं समुद्री मार्ग से जा रहा 300 कंटेनर माल नजदीक के देशों के बंदरगाहों में सुरक्षित स्थान खोज रहे हैं। संभावना है कि शिपिंग कंपनियां जल्द माल-भाड़ा सकती हैं। इससे निर्यातकों को दोहरा झटका लग सकता है। अब तक करीब 150-200 करोड़ का निर्यात आर्डर रोक दिया गया है।
खाड़ी देशों और ईरान को अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ, चारा फूड सप्लीमेंट और चमड़ा उत्पादों का निर्यात किया जाता है। युद्ध के चलते माल और भुगतान फंसने के डर से निर्यातकों ने ऑर्डर रोक दिए हैं। खासकर दुबई एयरपोर्ट बंद होने से सिंगापुर, यूरोप के देशों को जाने वाला माल रोक दिया गया है। जानकारों का कहना है कि युद्ध के कारण ईंधन महंगा हो गया है जिससे मालभाड़ा भी 15-20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। हालांकि शिपिंग कंपनियां और निर्यातक समुद्री मार्ग के जरिये अलग-अलग देशों में जा रहे कंटेनरों की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।
विज्ञापन

गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल में बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इने देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। ईरान ने इन सभी जगहों पर मिसाइलें दागी हैं। शहर से इन सभी देशों को 500-700 करोड़ का निर्यात किया जाता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 150-200 करोड़ के निर्यात ऑर्डर रोक दिए गए हैं। करीब 300 कंटेनर समुद्री मार्ग से अलग-अलग देशों को जा रहे थे। वे भी नजदीक के देशों के बंदरगाहों पर रोके जा रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचा तो निर्यातकों को दोहरा झटका लगेगा। माल-भाड़ा तो बढ़ना तय है। इससे उत्पाद महंगे हो जाएंगे।

समुद्री वाहनों को बनाया जा सकता है निशाना
समुद्री रास्ते से माल जाने में भी संकट है। दरअसल लाल सागर संकट का जोखिम पहले से ही है। हूती विद्रोहियों की ओर से समुद्री वाहनों को निशाना बनाया जाता है। युद्ध बढ़ने से इस रूट पर ही माल का आवागमन हो सकेगा। इस्राइल और ईरान के मार्ग के जरिये ही यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों में पहुंच होती है। हूती विद्रोहियों ने हमला करने का ऐलान भी किया है।

कंटेनरों की समस्या
ईंधन के दाम बढ़ने से लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ने की संभावना है। कंटेनरों की समस्या भी गहराएगी। अमेरिका की ओर से पहले चीन पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच समझौता हो गया। इससे चीनी कंपनियां तेजी से अपने ऑर्डर पूरे करने के लिए कंटेनरों को मंगाएंगी जिसका असर जल्द दिखेगा।




बातचीत

युद्ध लंबा खिंचने की संभावना बन रही है। यदि ऐसा होता है तो उत्पादन पर सीधा प्रभाव दिखेगा। निर्यातक पहले से ही परेशान थे। कच्चा तेल 8.3 प्रतिशत महंगा हो गया है। इससे लॉजिस्टिक कास्ट बढ़ जाएगी। होर्मुज जलडमरू का आवागमन रुक गया है। दुबई एयरपोर्ट बंद होने से सभी खाड़ी देशों के अलावा यूरोप और सिंगापुर के बाजार में आपूर्ति लड़खड़ा सकती है।
यादवेंद्र सचान, चर्म उत्पाद निर्यातक।
-
निर्यातकों के अलावा घरेलू उत्पादन के लिए अगले सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होगा। युद्ध बढ़ने की ही संभावना दिख रही है। इससे लागत खर्च बढ़ेगा। निर्यात तो प्रभावित होगा, आगे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। होली के कारण उत्पादन पहले से ही कुछ कम है। खाड़ी देशों के अलावा यूरोप के बाजारों में आवश्यक उत्पादों की कमी से माल महंगा हो सकता है।
विज्ञापन

आलोक अग्रवाल, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें