एक से 14 साल तक के बच्चों के किसी भी गंभीर रोग का इलाज अब सरकार अपने खर्च पर कराएगी। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना के तहत जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हर बुधवार को स्पेशल क्लिनिक में उनका चेकअप होगा। क्लिनिक में पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों से रेफर गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बच्चों को देखा जाएगा।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने बताया कि शासन में गंभीर बीमारी वाले बच्चों के इलाज के संबंध में बैठक हुई थी। जांच के लिए मेडिकल कॉलेजों में स्पेशल क्लिनिक बनाने का फैसला लिया गया।
क्लिनिक में हृदय रोग, मानसिक रोग, बाल रोग, मेडिसिन, टीबी, नेत्र रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहेंगे। बच्चों की हार्ट सर्जरी फिलहाल एसजीपीजीआई लखनऊ में होगी। अन्य इलाज मेडिकल कॉलेज में होगा।
शासन ने फोर डी के आधार पर बच्चों की बीमारियों के इलाज का फैसला लिया है। इनमें डेवलपमेंटल, डिफििशएंशी, डिजीज और डिफेक्ट्स शामिल हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जीएन द्विवेदी ने कहा कि क्लीनिक खोलने की तैयारी चल रही है।
-डेवलपमेंटल में देखने में दिक्कत, सुनने में दिक्कत, चलने में दिक्कत, बोलने में दिक्कत, अधिक चंचलता, व्यवहार शामिल हैं।
-डिफिशिएंशी में एनिमिया, विटामिन की कमी, थायराइड आदि को शामिल किया गया है।
-डिजीज में चर्म रोग, कान के रोग, रुमैटिक हार्ट डिजीज, दांत, झटके आदि शामिल हैं।
-डिफेक्ट्स कें डाउन सिंड्र्रोम, आंखों में भैंगापन, पैदाइशी बहरापन, हार्ट की पैदाइशी बीमारी, आंख के पर्दे की पैदाइशी बीमारी आदि शामिल है।