मुठभेड़ में घायल कर या दौड़ाकर पकड़ लेती है पुलिस
गोविंदनगर में रेलवे का अंडरपास हो या पश्चिम जोन के पनकी थाने का कपली वाला अंडरपास और पूर्वी जोन के चकेरी थाने का टटियन झनाका। ये स्थान भी पुलिस के लिए काफी फायदेमंद साबित हुए हैं। शराब तस्कर, बाइक चोर से लेकर लुटेरे और हत्यारोपी तक पुलिस को यहीं टहलते मिले हैं। इन्हें पुलिस ने मुठभेड़ में घायल कर या दौड़ाकर पकड़ लिया है।
न देखे जाने का डर न तीसरी नजर की फिक्र
इन सभी चुनिंदा स्थानों पर सूर्यास्त के बाद अंधेरा और सन्नाटा हो जाता है। ये ऑपरेशन त्रिनेत्र और घरेलू सीसीटीवी कैमरों की नजर से दूर हैं। ऐसे में इन स्थानों को चोरों ने भले अपने लिए मुफीद समझा हो लेकिन ये पुलिस के लिए ज्यादा भाग्यशाली साबित हुए हैं। वह यहां से आसानी से सभी को वीडियो बनाते हुए पकड़ लेती है, और जेल भेज देती है।
किदवईनगर का बरगदिया तिराहा
- 28 जुलाई 2024 को बगाही निवासी सागर कश्यप और मन्नु पाल को चोरी की बाइक समेत पकड़ा
- 30 सितंबर 2024 को मोबाइल लुटेरे दानिश को तमंचे के साथ पकड़ा।
- 30 नवंबर को गुंडा एक्ट के वांछित मोहम्मद शकील को यहीं से पकड़ा।
- 21 दिसंबर 2024 को छह माह के लिए जिला बदर गोवर्धनपुरवा निवासी शकील को भी यहीं पकड़ा।
नौबस्ता (सीओडी नाला)
6 जुलाई को हत्यारोपी दहेली ग्राम निवासी सौरभ सचान को मुठभेड़ के बाद धर दबोचा।
30 अक्तूबर को गुंजन विहार निवासी लुटेरे प्रतीक बाजपेई, दिलीप मिश्रा और मयंक अग्निहोत्री को गिरफ्तार किया।
थाना गोविंदनगर: (रेलवे अंडर पास)
- 14 मार्च संजय नगर कच्ची बस्ती निवासी शराब तस्कर अभिषेक को पकड़ा।
- 19 मार्च विजयनगर निवासी छोटू बाघमार को शराब तस्करी में पकड़ा।
- 21 मार्च कच्ची बस्ती गोविंद नगर निवासी बबलू को शराब तस्करी में पकड़ा।
- 27 मार्च को शराब तस्करी में दबौली निवासी पंकज को पकड़ा।
- 29 मार्च को शराब तस्करी में कच्ची बस्ती गोविंद नगर निवासी अर्जुन को पकड़ा।
- 31 मार्च को शराब तस्करी में गोविंदनगर निवासी चंद्रपाल को पकड़ा
- 17 सितंबर को लुटेरे सुमित ,अमन कश्यप और अमन कुमार को पकड़ा है
- 18 दिसंबर को बाइक चोर वीर प्रताप को यहीं से पकड़ा। उसने कानपुर समेत चार जिलों से तीन माह में दस बाइक चुराईं थीं।
अपराधी को हिरासत में कहीं से भी लिया जा सकता है। गिरफ्तारी दिखाने के दौरान अक्सर दूसरे थाना या जिले में गिरफ्तारी दिखाने की अतिरिक्त कार्रवाई से बचने के लिए कई बार खास स्थानों से ही गिरफ्तारी दिखा दी जाती है। -अनंत देव तिवारी, सेवानिवृत्त आईपीएस
पुलिस गिरफ्तारी दिखाने के लिए खास जगह का चुनाव नहीं करती है। जिन जगहों से आरोपी को पकड़ा जाता है, वहीं से लिखापढ़ी में भी दिखाया जाता है। संभावित स्थानों की निगरानी लगातार की जाती है, तभी आरोपी पकड़ा जाता है। -आशीष श्रीवास्तव, डीसीपी, क्राइम
कॉपी-पेस्ट के दौर में पुलिस सेट प्रोफाॅर्मा पर काम करती है। विवेचना के बाद पुलिसकर्मियों को कोर्ट में गवाही देनी होती है। सालों बाद गवाही का नंबर आता है। हर थाने में निश्चित स्थान चुनने से वहां की हर चीज को याद रखना आसान होता है। नक्शा नजरी बनाने में आसानी होती है। कई मुकदमों में गवाही देने से स्थान के आसपास की दुकानें, दिशा, सड़क, आने-जाने के रास्ते आदि अच्छी तरह से याद हो जाते हैं, जिससे जिरह में गवाह को तोड़ना मुश्किल होता है। -कमलेश पाठक, वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी