फतेहपुर जिले में स्कूल से लौट रही कक्षा सात की छात्रा को उसके पिता के घायल होने की झूठी खबर देकर अगवा करने और सात माह तक उसके साथ दुष्कर्म करने के एक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। अपर जिला जज कमलकांत श्रीवास्तव ने सभी गवाहों के बयान सुनने के बाद दोषी को दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा दी है।
मामला ललौली थानाक्षेत्र के एक गांव का हैं। यहां ईंट-भट्टा मजदूर की सोलह साल की बेटी कक्षा सातवीं में पढ़ती थी। 31 मार्च 2011 की शाम वह साइकिल से भाई के साथ स्कूल से लौट रही थी। रास्ते में उसे ललौली थाने के मुत्तौर गांव का रामू रैदास मिला। रामू ने उसे रास्ते में रोका और बताया कि तुम्हारे पिता एक दुर्घटना में घायल होकर जिला अस्पताल में भर्ती हैं।
तुम्हारी मां ने जिला अस्पताल बुलाया है। रामू ट्रैक्टर चालक था और उसी ईंट भट्टे से ईंटों की ढुलाई करता था, जिसमें छात्रा के पिता काम करते थे। उसकी बातों पर यकीन कर छात्रा जिला अस्पताल पहुंची तो देखा कि उसके पिता वहां नहीं थे। इस पर रामू ने उसे बताया कि हालत गंभीर होने के कारण उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया है और वह छात्रा को बहलाकर लखनऊ ले गया।
इधर, बेटी नहीं लौटी तो घर में हड़कंप मचा। दो दिन तक ढूंढने पर कुछ नहीं पता चला तो छात्रा के पिता ने पांच अप्रैल 2011 को ललौली थाने में एफआईआर लिखवा दी। सात महीने तक पुलिस छात्रा का पता नहीं लगा सकी।
इस दौरान सात जुलाई को कोर्ट के आदेश पर अभियुक्त रामू रैदास के घर को कुर्क भी कर दिया गया। 12 अक्तूबर 2011 को पुलिस ने शहर के रेलवे स्टेशन के पास से रामू और छात्रा को पकड़ा था। मुल्जिम रामू रैदास ने छात्रा को सात महीने तक लखनऊ और कानपुर में अलग-अलग जगहों पर रखा था। छात्रा को न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक में मामले की पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता रहस बिहारी श्रीवास्तव कर रहे थे।
अपर जिला जज कमलकांत श्रीवास्तव ने पूरे प्रकरण की सुनवाई करते हुए आरोपी को दस वर्ष के सश्रम कारावास और 18 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपी जुर्माने की रकम से 10 हजार रुपये पीड़िता को भी देय होंगे। जुर्माने की रकम का भुगतान न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मेडिकल में गर्भवती निकली छात्रा
पुलिस ने 12 अक्तूबर 2011 को जब छात्रा और मुल्जिम को गिरफ्तार किया तो छात्रा का मेडिकल कराया गया। छात्रा 22 सप्ताह की गर्भवती निकली थी। इसी से दुष्कर्म की पुष्टि भी हुई थी। आरोपी इन दिनों जमानत पर बाहर था।
भाई की गवाही से बहन को न्याय मिला
सहायक शासकीय अधिवक्ता रहस बिहारी श्रीवास्तव ने छात्रा को न्याय दिलाने के लिए अदालत के समक्ष एक के बाद एक नौ गवाह पेश किए। जिसमें से छात्रा के भाई की गवाही सबसे अहम रही। रामू रैदास जब बहाने से छात्रा को ले गया था। तब छात्रा का भाई भी साथ था। वह उस वक्त कक्षा चार में पढ़ता था। उसने आंखों देखी सारी बात पुलिस और अदालत के समक्ष बताई। जिसके आधार पर मुल्जिम को सजा दिलाई जा सकी।