नौका विहार, फूलबाग फूलमंडी खाली कराने पहुंचे अफसरों और पुलिस ने विरोध कर रहे फूलबाग फूल मंडी के अध्यक्ष पूर्व पार्षद उमाकांत यादव और फूल किसानों को जमकर पीटा।
बाहर से आए 20-25 अन्य युवकों ने भी पुलिस और अफसरों के सामने फूल किसानों पर हमला करके जमकर मारपीट की जिससे सपा के पूर्व विधानसभा क्षेत्र सचिव गंगा प्रसाद साहू की हालत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। आठ व्यापारी जख्मी भी हुए।
मंडी उजाड़ने के बाद पुलिस ने घायल उमाकांत को कोतवाली ले जाकर हवालात में डाल दिया। उन पर शांति भंग का मामला दर्ज किया। लोगों ने कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव को सूचना दी तो उन्होंने शहर के नेताओं से बात की। फिर सपाई कोतवाली पहुंच गए और हवालात में बंद उमाकांत को छुड़वा लिया और उनसे तहरीर दिलवाई।
गुस्साए किसानों ने रात में ही मंडी स्थल में धरना दे दिया और सुबह पुन: मंडी लगवाने का ऐलान किया। फूलबाग में नौका विहार के बाहर अगस्त 2014 से फूलमंडी लग रही है। डीएम ने शुक्रवार को इस मंडी को खत्म कराने के निर्देश दिए। शनिवार को इसका पता चलने पर पार्षद नीना अवस्थी, नवीन पंडित, शमीम आजाद आदि वहां पहुंचे और नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन से फूलमंडी न हटाने की मांग की।
दोपहर एक बजे पार्षदों के लौटने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट अमरपाल सिंह, एसीएम, कोतवाली सीओ ओपी सिंह, नगर निगम जोन-1 के प्रभारी नंदकिशोर जेसीबी लेकर वहां पहुंचे तो महिलाओं सहित अन्य व्यापारी धरने पर बैठ गए। फूलबाग फूलमंडी के अध्यक्ष उमाकांत यादव का आरोप है कि उन्होंने विरोध किया तो सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें थप्पड़ मारा, तभी शिवाला के 20 - 25 युवक वहां पहुंचे और अफसरों के सामने ही किसानों को पीटने लगे।
उमाकांत को पीटा। उनके 35000 रुपये और अंगूठी छीन ली। किसानों भइयन, अरविंद कुशवाहा सहित आठ-नौ लोगों को चोटें आईं। इसके बाद अफसरों ने जेसीबी चलाकर मंडी तोड़ डाली और फूल फेंक दिए। फूलबाग फूलमंडी के संरक्षक सोनेलाल ने बताया कि गौशाला, डिफेंस कालोनी निवासी सपा नेता गंगा प्रसाद साहू को भी चोट आई। गिरने से उनके सीने में दर्द होने लगा। साथ में मौजूद बेटा सुरेंद्र उन्हें लाल बंगला के नर्सिंगहोम में ले गया, जहां से दूसरे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
सोनेलाल ने फैक्स से मंत्री शिवपाल यादव को सूचना दी तो शिवपाल ने कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद रात में सपा नगर अध्यक्ष महताब आलम सहित तमाम सपाई कोतवाली पहुंचे और उमाकांत को छुड़वाया। शिवपाल से बातचीत के बाद किसानों और व्यापारियों ने उसी स्थल पर 31 जनवरी को सुबह से फूलमंडी लगाने का ऐलान किया। रात में वे वहां धरने पर बैठे रहे।