उरई कोतवाली क्षेत्र में दुकानदार की गोली से घायल झांसी पीएसी के सिपाही अरविंद सिंह की कानपुर में रीजेंसी अस्पताल में गुरुवार शाम मौत हो गई। वह मात्र 28 साल के थे। पुलिस ने शव का रात में ही पैनल से पोस्टमार्टम कराने का फैसला किया है।
गोली से घायल पीएसी झांसी के ही दूसरे सिपाही मुसमरिया निवासी कृष्णकुमार भोले की हालत गंभीर बनी हुई है। वह भी कानपुर में ही फॉर्च्यून अस्पताल में भर्ती है। कोतवाली पुलिस का कहना है कि सिपाहियों के परिवारीजनों की ओर से अब तक कोई तहरीर नहीं मिली है, गोली चलाने वाले दुकानदार की तलाश में दबिश दी जा रही है। वारदात बुधवार को हुई थी। दोनों सिपाही स्कार्पियो की सजावट कराने के लिए उरई के अंबेडकर चौराहा स्थित मां तुलसा कार शृंगार नाम की दुकान पर गए थे।
बताया जा रहा है कि सामान के रुपयों को लेकर सिपाहियों का दुकानदार नीलू से झगड़ा हो गया। मारपीट के बाद बात इतनी बढ़ी कि नीलू ने फायरिंग कर दी। गोली दोनों सिपाहियों के पेट में लगी थी। न्यामतपुर जालौन निवासी अरविंद सिंह झांसी 33 बटालियन पीएसी में तैनात थे।
सीओ सिटी डॉ. जंगबहादुर सिंह ने पीड़ित पक्ष से तहरीर लेने के लिए टीम को कानपुर भी भेजा था, पर अभी तक तहरीर नहीं दी गई है। इससे मुकदमा दर्ज नहीं किया है। आरोपी दुकानदार को भी नहीं पकड़ा गया है। सीओ सिटी का कहना है कि मामला क्या है, इसकी सही जानकारी सिपाही के होश में आने या दुकानदार से मिल पाएगी।
शरीर में दो गोलियां लगी थीं
पीएसी सिपाही अरविंद सिंह यादव को दो गोलियां लगी थीं। एक गोली दाहिने कंधे से होते हुए रीढ़ की हड्डी तक पहुंच गई और दूसरी सामने से हार्ट के ठीक नीचे धंसी थी। दोनों गोलियां ऑपरेशन करके निकाल दी र्गइं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण अधिक खून बहना आया है। देर रात पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर उरई के लिए रवाना हो गए।
हत्यारे ने दिया जिंदगी भर का गम
कानपुर (ब्यूरो)। सिपाही अरविंद के पिता राज बहादुर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचते ही चीख पड़े आखिर इतना बड़ा कौन सा गुनाह कर दिया था बेटे ने जो उस हत्यारे ने हमें जीवन भर गम दे दिया। वहीं कोने में बैठे अरविंद के बूढ़े बाबा की आंखों से आंसू थमने नहीं रहे थे। बाबा के मुताबिक पुलिस उस हत्यारे पर कतई रहम न करे, और उसे जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाए।
मौके पर मौजूद पीएसी के सिपाहियों ने बताया कि अरविंद की पत्नी शारदा और मां सावित्री को मौत की सूचना देने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। घर पर अरविंद के दोनों बच्चे ऋषभ (5) और तनिष्का (7) अपने पापा के अस्पताल से घर लौटने का रास्ता देख रहे हैं। परिजनों ने बताया कि अरविंद का एक छोटा भाई देवेंद्र और बहन बीनू भी है।