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खुद को ज्योतिषी, डॉक्टर, टीचर कहने वाला ये शख्स घर में छापता था नकली नोट

Wed, 08 Feb 2017 06:01 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर में पकड़ा गया नकली नोटों का कारखाना - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर बिठूर के हिंगूपुर गांव में नकली नोट छापने वाला प्राइवेट स्कूल के संचालक नरेंद्र कुमार निषाद बड़ा ही शातिर निकला। नरेंद्र ने 1988 में पीपीएन डिग्री कालेज से बॉयोलॉजी से बीएससी किया था। वह इंटरमीडिएट तक के छात्र-छात्राओं को कोचिंग पढ़ाता है। खुद को बीएमएस डॉक्टर भी बताता है। उसने बताया कि वह बिठूर में क्लीनिक भी चलाता था। यही नहीं वह खुद को ज्योतिष भी बताता है। परिवार में पत्नी नीरू और एक बेटी है। नरेंद्र स्कूल के ऊपर बने कमरे में रहता है। पत्नी और बेटी निचले हिस्से में रहते हैं।
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सरकारी विभागों की 155 मोहरें बरामद

नरेंद्र निषाद - फोटो : अमर उजाला
निषाद को पुलिस और स्वॉट टीम ने मंगलवार को दबोच लिया था। उसके घर से 6.46 लाख रुपये के नकली नोट, मुद्रित कागज, सुरक्षा धागा, नंबरिंग मशीन, प्रिंटर, मॉनीटर, की-बोर्ड, कई स्कूलों के प्राचार्यों, प्रबंधकों और सरकारी विभागों से जुड़े अफसरों की 155 मोहरें बरामद हुईं हैं। नरेंद्र ने पुलिस को बताया कि वह अब तक लाखों रुपये के नकली नोट चौबेपुर, बिल्हौर, शुक्लागंज (उन्नाव), सचेंडी, पनकी और कल्याणपुर बाजार में खपा चुका है। आज-कल नकली नोट विधानसभा चुनाव में खपाने के लिए तैयार कर रहा था। 20 प्रतिशत कमीशन पर राजनीतिक दलों को नकली नोट सप्लाई करने योजना थी। बता दें कि इससे पहले 4 जनवरी को कानपुर देहात के पुखरायां के मीरपुर गांव में नकली नोट छापने का कारखाना पकड़ा गया था।
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कमरे में नकली नोट छापने का कारखाना

नरेंद्र का घर जहां चल रहा था नकली नोट छापने का कारखाना - फोटो : अमर उजाला
कल्याणपुर सीओ संजीव दीक्षित ने बताया कि बिठूर एसओ जितेंद्र प्रताप सिंह और स्वॉट टीम प्रभारी केके सिंह ने टीम के साथ हिंगूपुर स्थित एसएस पब्लिक स्कूल के संचालक नरेंद्र कुमार निषाद के घर छापा मारा था। स्कूल के ऊपरी तल पर बने नरेंद्र के कमरे में नकली नोट छापने का कारखाना मिला। नरेंद्र को पकड़ लिया गया। सीओ के मुताबिक रिटायर्ड ग्राम विकास अधिकारी मन्नी लाल के बेटे नरेंद्र के कमरे से दो हजार के 128, 500 के 380 नोट और 100 के 800 नकली नोट (कुल 6.46 लाख रुपये) मिले। कमरे से चार नंबरिंग मशीनें, दो प्रिंटर, सीपीओ, एक मॉनीटर, की-बोर्ड, कैंची, ए-4 साइज के 215 कागज, 100 रुपये के अर्धमुद्रित नोट, विभिन्न विभाग के अधिकारियों के पदनाम की मोहरें भी मिलीं। नरेंद्र एक साल से घर पर ही नकली नोट का कारखाना चला रहा था। पूछताछ में नरेंद्र ने बताया कि विधानसभा चुनाव में नेताओं को सप्लाई के लिए भारी मात्रा में नकली नोट छाप रहा था। 
 
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