जिला जज इफाकत अली खान की कोर्ट में ज्योति मर्डर केस में जीडी लिखने वाले सिपाही श्रीनारायण की बुधवार को गवाही हुई। उसने बताया कि घटना वाले दिन पीयूष, उसके पिता ओमप्रकाश और अभिनव पोद्दार रिपोर्ट लिखाने स्वरूप नगर थाने आए थे। इसके बाद पीयूष को मेडिकल कराने होमगार्ड शंभू सिंह के साथ भेजा था।
काफी देर बाद लौटे होमगार्ड ने बताया कि पीयूष बिना मेडिकल कराए हैलट से चले गए हैं। इस पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता सईद नकवी और कमलेश पाठक ने सिपाही से पूछा कि क्या पुलिस अभियुक्त के अलावा वादी का भी मेडिकल कराती है। इस पर सिपाही ने जवाब दिया कि जरूरत पड़ने पर वादी का मेडिकल होता है। जिरह में उनसे और भी कई सवाल किए गए।
अब मामले की सुनवाई नौ फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान जेल से ज्योति के पति पीयूष श्यामदासानी, अवधेश, सोनू, रेनू और आशीष को कोर्ट में लाया गया। मनीषा मखीजा, पीयूष के चचेरे भाई मुकेश और कमलेश भी कोर्ट में पेश हुए। मामले में पीयूष के पिता ओम प्रकाश और मां पूनम की हाजिरी माफी लगाई गई थी।
बेटी की हत्या में पिता को उम्र कैद
कानपुर। एडीजे अनुपम कुमार की कोर्ट ने बेटी की हत्या में पिता को उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। बड़े भाई के खिलाफ भतीजी की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने वाला भाई, पिता और मां समेत सभी गवाह अदालत में गवाही में मुकर गए थे। कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर सजा सुनाई।
गुजैनी निवासी राजवीर सिंह ने गोविंद नगर थाने में अपने बड़े भाई जय सिंह के खिलाफ वर्ष 2011 में 11 साल की भतीजी जानह्वी की गला घोटकर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि उसके भाई ने राजकुमारी यादव से शादी की थी। जानह्वी के पैदा होने के बाद वह भाई को छोड़कर कहीं चली गई थी।
बेटी की परवरिश उसके बाबा रनवीर सिंह और दादी चंदा देवी करते थे। इन लोगों ने उसका एडमिशन हर्डसन मेमोरियल स्कूल सिविल लाइंस में कराया था। वह वहीं हॉस्टल में रहती थी। छुट्टी के कारण घर आई थी।
छह जून 2011 की रात एक बजे जय सिंह ने गला घोटकर जानह्वी की हत्या कर दी थी। शासकीय अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी ने बताया कि कोर्ट में वादी, अभियुक्त के पिता, मां और बहू समेत सभी गवाह मुकर गए।
इनका कहना था कि जानह्वी की मौत बीमारी से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोटने से मौत की पुष्टि हुई थी। पिता और बेटी की मौजूदगी जैसे परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर कोर्ट ने सजा सुनाई।
पत्नी की हत्या में पति को भी उम्र भर की कैद
कानपुर। फास्ट ट्रैक कोर्ट वाणीरंजन ने एक व्यक्ति को पत्नी की हत्या में उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। घटना की रिपोर्ट दहेज हत्या में दर्ज हुई थी।
दहेज की मांग कोर्ट में साबित न होने से सास, ननद और ननदोई को बरी कर दिया गया है। थरियांव फतेहपुर निवासी आशुतोष द्विवेदी ने भिखारीपुर कोतवाली फतेहपुर निवासी चंद्रहास पांडेय, उसकी मां नन्ही, बहन दिनसिया, जीजा कृष्णचंद्र मिश्र के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें कहा था कि उसने बहन रीतू की शादी 27 अप्रैल 2008 को चंद्रहास के साथ की थी। शादी के बाद से ही ये लोग दहेज में बाइक और पचास हजार रुपये की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर चंद्रहास रीतू को घुमाने के बहाने कानपुर ले गया। वहां सेंट्रल धर्मशाला घंटाघर के कमरा नंबर 13 में रुके। इसी बीच रीतू को जहर खिलाकर फरार हो गया।
इससे उसकी मौत हो गई। शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र उत्तम ने बताया कि कोर्ट में मृतका की मां और पिता गवाही में मुकर गए। सिर्फ वादी ही अपने बयानों पर अडिग रहा। दहेज की बात साबित न होने पर हत्या का आरोप सिद्ध हुआ। घटना के समय सास, ननद और ननदोई नहीं थे इसलिए उन्हें दोष मुक्त करार दिया गया।