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दौरा तूफानी, पर अफसरों ने फेरा पानी

Fri, 19 Feb 2016 02:19 AM IST
अमर उजाला, ब्यूरो
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फजलगंज, पनकी और दादानगर औद्योगिक क्षेत्र की दशा सुधारने के लिए डीएम कौशलराज शर्मा का तूफानी दौरा देखकर उद्यमियों को भरोसा हुआ था कि अब यहां के हालात सुधरेंगे लेकिन अफसरों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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डीएम ने आठ फरवरी को औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा कर उद्योग बंधु की बैठक की थी, जिसमें कई कामों को पूरा करने के लिए समय भी तय किया था। जिन कामों को पूरा करने के लिए 10 दिन का समय तय हुआ, उनकी अवधि गुरुवार 18 फरवरी को समाप्त हो गई। अमर उजाला ने भी इन कामों की हकीकत जानी, तब सामने आया कि संबंधित अफसरों ने डीएम के आदेशों की हवा निकाल दी। आप भी पढ़िए आंखों देखी...

10 फीसदी भी साफ नहीं हुआ नहर का किनारा
पनकी से सीटीआई तक नहर किनारे पड़ी मिट्टी उठाने के लिए डीएम ने सिंचाई विभाग के एसडीओ अखिलेश गौतम को 10 दिन का समय दिया था। साथ ही कहा था कि सिल्ट हटाने में परेशानी हो रही हो या बजट न हो तो उद्यमियों को मुफ्त में मिट्टी उठाने की छूट दें ताकि रास्ता जल्द चौड़ा किया जा सके।
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निर्धारित समय में सिर्फ 10 फीसदी ही मिट्टी उठाई जा सकी। मिट्टी उठाने के लिए एक ही ट्राली लगी है। पूरे दिन में दो तीन ट्राली ही मिट्टी उठ रही है। यही रफ्तार रही तो दो किमी में महीनों लगेंगे। इस रोड पर जगह-जगह अतिक्रमण भी है। सीटीआई चौराहे से विजय नगर तक लागू वन वे व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना है। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र के वाहनों को पनकी और दादानगर से निकल रही नहर के किनारे की सड़क से सीटीआई तक पहुंचाने की योजना है।

सीईटीपी के लिए कार्ययोजना नहीं तैयार
पनकी औद्योगिक क्षेत्र के लिए प्रस्तावित दो सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के लिए भी कार्ययोजना निर्धारित समय पर तैयार नहीं हो सकी।

डीएम ने घरेलू और फैक्ट्रियों से निकलने वाले पानी की निकासी की व्यवस्था न होने पर सीईटीपी के निर्माण पर जोर दिया था। यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों से 10 दिन में दो सीईटीपी के लिए कार्ययोजना मांगी थी। हिदायत भी दी थी कि यदि वह कार्ययोजना न बना पाएं तो जलनिगम से भी काम करवाया जा सकता है।

कब्जे के लिए अभी और करें इंतजार
रूमा में यूपीएसआईडीसी के औद्योगिक भूखंड का एलॉटमेंट होने के बाद भी कब्जा न मिलने का मामला अभी भी सुलझता नहीं दिख रहा है।

यूपीएसआईडीसी के अफसर निर्धारित 10 दिन में प्लाटों का कब्जा दिलाए जाने का हल नहीं ढूंढ सके। डीएम ने यह रिपोर्ट भी 10 दिन में मांगी थी कि किस औद्योगिक क्षेत्र में यूपीएसआईडीसी ने जमीन का अधिग्रहण किया, कितनी एलॉट कर दी और कितनों को कब्जा दे दिया।
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